AGENGG 311 Lecture 03: विभिन्न प्रकार के बायोगैस संयंत्रों से परिचय | Hindi Notes
AGRO PATH FINDERAGENGG 311 · Renewable Energy in Agriculture
विषय सूची · Quick Navigation
02 अधिगम उद्देश्य (Learning Objectives)03 प्रस्तावना एवं मूल अवधारणा (Introduction)04 महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं समीकरण (Important Principles and Concepts)08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व गणनाएँ (Scientific & Practical Examples)09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं तकनीकी मानक (Formulas & Key Metrics)11 व्याख्यान-विशिष्ट माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts & Visual Diagrams)13 महत्वपूर्ण तथ्य एवं परीक्षा टिप्स (Important Facts & Exam Tips)14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Panel)15 बहुविकल्पीय प्रश्न — उत्तर एवं व्याख्या सहित (10 MCQs with Answers)16 अति-लघु, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न व वन-लाइनर्स (Exam Question Bank)Lecture 03: विभिन्न प्रकार के बायोगैस संयंत्रों से परिचय
Familiarization with different types of biogas plants
02 अधिगम उद्देश्य (Learning Objectives)
इस व्याख्यान (Lecture) के अध्ययन के पश्चात् विद्यार्थी निम्नलिखित में सक्षम होंगे:
- बायोगैस (Biogas) के संघटन, कैलोरी मान (4713 kcal/m³) तथा गोबर के उपलों व जलाऊ लकड़ी की तुलना में इसकी तापीय दक्षता (Thermal efficiency) को समझना।
- भारत में बायोगैस प्रौद्योगिकी के ऐतिहासिक विकास (1941 IARI, 1956 जशु भाई पटेल, 1961 KVIC, 1978 PRAD जनता, 1984 AFPRO दीनबंधु) को जानना।
- बायोगैस संयंत्रों को फीडिंग विधि (Batch vs Continuous) और गैस होल्डर डिजाइन (Floating Drum vs Fixed Dome) के आधार पर वर्गीकृत करना।
- हाइड्रोलिक रिटेंशन टाइम (HRT – 30, 40, 55 दिन) तथा स्कम (Scum) की अवधारणा को समझना।
- फिक्स्ड डोम संयंत्रों (जनता एवं दीनबंधु मॉडल) तथा फ्लोटिंग ड्रम संयंत्रों (KVIC, प्रगति एवं गणेश मॉडल) के भागों, निर्माण और कार्यप्रणाली का सचित्रात्मक व तुलनात्मक अध्ययन करना।
03 प्रस्तावना एवं मूल अवधारणा (Introduction)
मूल सामग्री (Core Course Content): बायोगैस (Biogas / गोबर गैस) विभिन्न गैसों का एक ज्वलनशील मिश्रण है जो ऑक्सीजन की अनुपस्थिति (अवायवीय स्थिति – Anaerobically) और नमी (Moisture) की उपस्थिति में कार्बनिक पदार्थों के सूक्ष्मजैविक विखंडन से उत्पन्न होता है। प्राप्त बायोगैस में मुख्यतः मीथेन () : 55–65% और कार्बन डाइऑक्साइड () : 30–40% होती है। इसके अतिरिक्त इसमें नाइट्रोजन, हाइड्रोजन, कार्बन मोनोऑक्साइड, ऑक्सीजन, हाइड्रोजन सल्फाइड () और जलवाष्प के अंश (Traces) पाए जाते हैं।
तापीय दक्षता एवं ऐतिहासिक महत्व:
- बायोगैस का कैलोरी मान (Calorific Value): 4713 kcal/m³ (दहन दक्षता ~55-60%)।
- गोबर के उपले (Dung Cake): कैलोरी मान 2093 kcal/kg होता है और चूल्हे में जलाने पर तापीय दक्षता मात्र 11% होती है।
- जलाऊ लकड़ी (Firewood): कैलोरी मान 4978 kcal/kg होता है और चूल्हे में जलाने पर तापीय दक्षता लगभग 17.3% होती है।
- अतः खाना पकाने के लिए बायोगैस एक अत्यंत कुशल एवं स्वच्छ ईंधन है। भारत में पहला बायोगैस संयंत्र वर्ष 1941 में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली में स्थापित किया गया था।
04 महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिभाषाएँ (Important Definitions)
05 विस्तृत विषय व्याख्या (Detailed Topic Explanation)
1. ग्रामीण क्षेत्रों में बायोगैस संयंत्र के लाभ (Advantages of Biogas Plants)
- (a) ग्रामीण अनुकूलता: यह तकनीक ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों के लिए अत्यंत उपयुक्त है।
- (b) स्थानीय उत्पादन व वितरण: बायोगैस स्थानीय स्तर पर उत्पन्न होती है और घरेलू उपयोग के लिए आसानी से वितरित की जा सकती है।
- (c) वनों की कटाई में कमी: यह ग्रामीण गरीबों की पारंपरिक ईंधन (जलाऊ लकड़ी) पर निर्भरता कम करती है, जिससे वनोन्मूलन (Deforestation) रुकता है।
- (d) स्वच्छता एवं पर्यावरण सुधार: गाँवों में बायोगैस के उपयोग से स्वच्छता की स्थिति (Sanitary condition) सुधरती है और पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रित होता है।
- (e) उच्च गुणवत्ता वाली खाद: इसके उप-उत्पाद (By-product) के रूप में नाइट्रोजन-समृद्ध जैविक खाद (Slurry manure) प्राप्त होती है।
- (f) महिला स्वास्थ्य एवं श्रम में राहत: यह महिलाओं के कठिन श्रम (Drudgery) को कम करती है तथा धुएँ से होने वाले आँखों और फेफड़ों के रोगों (Eye and lung diseases) की घटनाओं को घटाती है।
2. हाइड्रोलिक रिटेंशन टाइम (HRT) एवं तापमान क्षेत्र
डाइजेस्टर से 80-90% गैस प्राप्त करने के लिए भारत के विभिन्न तापमान क्षेत्रों के अनुसार HRT निम्न प्रकार निर्धारित है:
- 20°C से अधिक औसत परिवेश तापमान (Warm/Tropical zone): 30 दिन HRT।
- 15°C से 20°C औसत परिवेश तापमान (Moderate zone): 40 दिन HRT (राजस्थान के लिए 40 दिन का HRT अनुशंसित है)।
- 15°C से कम औसत परिवेश तापमान (Cold/Hilly zone): 55 दिन HRT।
3. फिक्स्ड डोम प्रकार के बायोगैस संयंत्र (Fixed Dome Type Biogas Plants)
फिक्स्ड डोम संयंत्रों में डाइजेस्टर और गैस होल्डर (गुंबद) एक ही स्थायी ईंट-सीमेंट संरचना के रूप में भूमिगत बने होते हैं। इसके दो प्रमुख मॉडल हैं:
(A) जनता बायोगैस संयंत्र (Janata Biogas Plant)
- विकासकर्ता एवं वर्ष: इसे वर्ष 1978 में PRAD (Planning Research and Action Division, लखनऊ) द्वारा विकसित किया गया था (यह भारत का पहला फिक्स्ड डोम संयंत्र था)।
- संरचना एवं 5 मुख्य भाग (Construction – 5 Sections): यह ईंट और सीमेंट की बनी संरचना है जिसके निम्नलिखित 5 भाग होते हैं:
- मिक्सिंग टैंक (Mixing Tank): भूमि के स्तर से ऊपर (Above ground level) स्थित होता है जहाँ गोबर और पानी (1:1) मिलाया जाता है।
- इनलेट टैंक / कक्ष (Inlet Tank/Chamber): मिक्सिंग टैंक भूमिगत रूप से एक ढलानदार (Sloping) इनलेट चैंबर में खुलता है।
- डाइजेस्टर (Digester): इनलेट चैंबर नीचे से डाइजेस्टर में खुलता है, जो गुंबद जैसी छत (Dome-like ceiling) वाला एक विशाल बेलनाकार भूमिगत टैंक होता है।
- गैस आउटलेट (Gas Outlet): डाइजेस्टर की गुंबदनुमा छत के शीर्ष पर बायोगैस की आपूर्ति के लिए वाल्व (Valve) युक्त एक गैस आउटलेट पाइप लगा होता है।
- आउटलेट टैंक (Outlet Tank): डाइजेस्टर नीचे से एक आउटलेट चैंबर में खुलता है, और यह आउटलेट चैंबर ऊपर की ओर एक छोटे ओवरफ्लो टैंक (Overflow tank) में खुलता है।
- कार्यप्रणाली (Working of Fixed Dome Plant):
- मिक्सिंग टैंक में बायोमास (गोबर) को बराबर मात्रा में पानी के साथ मिलाकर स्लरी (Slurry) बनाई जाती है और इनलेट चैंबर के माध्यम से डाइजेस्टर में भरा जाता है।
- प्रारंभ में डाइजेस्टर भरने के बाद कुछ दिनों के लिए नया घोल डालना बंद कर दिया जाता है। इस दौरान अवायवीय जीवाणु (Anaerobic bacteria) पानी की उपस्थिति में बायोमास का किण्वन करते हैं और बायोगैस बनती है जो डाइजेस्टर के गुंबद (Dome) में एकत्र होने लगती है।
- जैसे-जैसे गुंबद में अधिक गैस एकत्र होती है, गैस द्वारा डाला गया दाब (Pressure) पचित स्लरी (Spent slurry) को धकेल कर आउटलेट चैंबर में और वहाँ से ओवरफ्लो टैंक में भेज देता है।
- ओवरफ्लो टैंक से पचित स्लरी को निकालकर खाद के रूप में उपयोग किया जाता है। जब गैस वाल्व खोला जाता है, तो गैस रसोई तक पहुँचती है और स्लरी का स्तर पुनः संतुलित हो जाता है।
(B) दीनबंधु बायोगैस संयंत्र (Deenbandhu Biogas Plant)
- विकासकर्ता एवं वर्ष: यह जनता बायोगैस संयंत्र का संशोधित और उन्नत संस्करण है। इसे वर्ष 1984 में AFPRO (Action for Food Production, नई दिल्ली) द्वारा विकसित किया गया था। यह सबसे कम लागत वाला और सर्वाधिक लोकप्रिय फिक्स्ड डोम संयंत्र है।
- दीनबंधु संयंत्र के 6 मुख्य घटक (Components of Deenbandhu Plant):
- नींव (Foundation): संयंत्र की नींव कटोरे के आकार (Bowl-shaped) की होती है जिसकी परिधि के चारों ओर एक कॉलर (Collar) बना होता है। इसी कॉलर पर डाइजेस्टर गुंबद का निर्माण किया जाता है।
- डोम डाइजेस्टर (Dome Digester): गुंबद दो भागों में बँटा होता है—(a) निचला भाग डाइजेस्टर (Digester) कहलाता है जहाँ गोबर-पानी का मिश्रण जीवाणु क्रिया से अपघटित होता है, और (b) ऊपरी भाग गैस भंडारण (Gas storage) कहलाता है जहाँ उत्पन्न गैस एकत्र होती है।
- मिक्सिंग टैंक (Mixing Tank): यहाँ गोबर और पानी को अच्छी तरह मिलाकर इनलेट पाइप में छोड़ा जाता है।
- इनलेट पाइप (Inlet Pipe): जनता मॉडल के चौड़े इनलेट चैंबर के स्थान पर दीनबंधु में एसबेस्टस सीमेंट या पीवीसी का इनलेट पाइप लगा होता है जो मिक्सिंग टैंक को सीधे डाइजेस्टर से जोड़ता है (इससे निर्माण लागत घटती है)।
- गैस आउटलेट पाइप (Gas Outlet Pipe): गुंबद के शीर्ष पर एक निप्पल (Nipple) फिट होता है जो GI पाइप से जुड़कर रसोई तक गैस पहुँचाता है।
- आउटलेट टैंक (Outlet Tank): जहाँ डाइजेस्टर से बाहर आने के बाद स्लरी जमा होती है। यह दो भागों में होता है—निचला भाग छोटा व आयताकार होता है जो गुंबद के निकास से जुड़ा रहता है, और ऊपरी भाग बड़ा आयताकार टैंक (Displaced slurry chamber) होता है जिसमें ओवरफ्लो आउटलेट बना होता है।
4. फ्लोटिंग गैस होल्डर प्रकार के बायोगैस संयंत्र (Floating Gas Holder Type Biogas Plants)
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: वर्ष 1956 में भारत के जशु भाई जे. पटेल (Jashu Bhai J. Patel) ने पहला फ्लोटिंग ड्रम बायोगैस संयंत्र डिजाइन किया, जिसे लोकप्रिय रूप से ‘गोबर गैस प्लांट’ (Gobar Gas Plant / Gramlakshmi) कहा गया। बाद में वर्ष 1961 में खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC – Khadi and Village Industries Commission) ने इस डिजाइन को पेटेंट कर अपनाया।
फ्लोटिंग गैस होल्डर संयंत्रों के 5 प्रकार:
- KVIC मॉडल (KVIC Model): बेलनाकार (Cylindrical) ईंट-चिनाई वाले डाइजेस्टर के साथ।
- प्रगति मॉडल (Pragati Model): अर्धगोलाकार (Hemisphere) डाइजेस्टर के साथ (KVIC की तुलना में उथला व कम खर्चीला)।
- गणेश मॉडल (Ganesh Model): डाइजेस्टर एंगुलर स्टील, बाँस (Bamboos) और प्लास्टिक फॉयल (Polythene sheet) से बना होता है।
- प्री-फैब्रिकेटेड प्रबलित कंक्रीट (Pre-fabricated reinforced concrete compound units) से निर्मित फ्लोटिंग ड्रम प्लांट।
- फाइबर ग्लास प्रबलित पॉलिएस्टर (FRP – Fiber glass reinforced polyester) से निर्मित फ्लोटिंग ड्रम प्लांट।
KVIC बायोगैस संयंत्र की संरचना एवं कार्यप्रणाली (Construction & Working of KVIC Model)
- मिक्सिंग टैंक (Mixing Tank): भूमि स्तर से ऊपर स्थित।
- डाइजेस्टर टैंक (Digester Tank): भूमिगत गहरे कुएँ जैसी संरचना (Deep underground well-like structure)। महत्वपूर्ण नियम: यदि संयंत्र की क्षमता 3 घन मीटर (3 m³) से अधिक होती है, तो डाइजेस्टर को बीच में एक विभाजन दीवार (Partition wall) बनाकर दो कक्षों (Two chambers) में विभाजित किया जाता है ताकि ताजा घोल बिना पचे सीधे बाहर न निकले।
- इनलेट एवं आउटलेट पाइप: इसमें दो लंबे सीमेंट पाइप होते हैं—(i) ताजी स्लरी डालने के लिए इनलेट पाइप और (ii) पचित स्लरी को ओवरफ्लो टैंक में निकालने के लिए आउटलेट पाइप।
- गैस होल्डर (Gas Holder): डाइजेस्टर के ऊपर उल्टा रखा हुआ एक स्टील का ड्रम (Inverted steel drum) जो गैस भरने पर ऊपर उठता है और गैस निकलने पर नीचे जाता है (अर्थात् स्लरी के ऊपर तैरता है – Floats)। इससे गैस हमेशा स्थिर दाब (Constant pressure) पर मिलती है।
- गाइड फ्रेम (Guide Frame): यह लोहे की संरचना है जो गैस होल्डर को ऊपर-नीचे गति करने में मदद करती है। गाइड फ्रेम आवश्यक होने के 3 मुख्य कारण:
- तैरता हुआ ड्रम बाहरी दीवारों को न छुए (Must not touch the outer walls)।
- ड्रम तिरछा न हो (Must not tilt), अन्यथा उसकी पेंट/कोटिंग खराब हो जाएगी या वह फँस (Stuck) जाएगा।
- यह मरम्मत के लिए गैस ड्रम को आसानी से बाहर निकालने की सुविधा देता है।
- गैस आउटलेट एवं स्लरी आउटलेट टैंक: ड्रम के शीर्ष पर वाल्व युक्त लचीली पाइप से गैस आउटलेट जुड़ा होता है, और आउटलेट पाइप के ऊपर भूमि स्तर पर स्लरी आउटलेट टैंक बना होता है।
06 प्रकार एवं वैज्ञानिक वर्गीकरण (Types and Classification)
बायोगैस संयंत्रों का मुख्य वर्गीकरण (Classification of Biogas Plants):
- फीडिंग या चार्जिंग की विधि के आधार पर:
- (A) बैच प्रकार का संयंत्र (Batch Type Biogas Plant):
- यह वहाँ उपयुक्त है जहाँ प्रतिदिन कच्चे अपशिष्ट की आपूर्ति कठिन होती है।
- इसे 50–60 दिनों के अंतराल पर एक साथ भरा (Charged) जाता है।
- चार्ज करने के 8–10 दिनों बाद यह गैस देना शुरू करता है और पाचन पूर्ण होने तक 40–50 दिनों तक गैस देता है; इसके बाद इसे खाली करके पुनः चार्ज किया जाता है।
- इसमें गैस का उत्पादन असमान (Uneven) होता है, कई डाइजेस्टरों के कारण अधिक स्थान और उच्च प्रारंभिक लागत लगती है।
- ऐसे संयंत्र यूरोपीय देशों (European countries) में लगाए जाते हैं और भारतीय ग्रामीण परिस्थितियों के अनुकूल नहीं हैं।
- (B) सतत प्रकार का संयंत्र (Continuous Type Biogas Plant):
- इसमें डाइजेस्टर में प्रतिदिन नियमित रूप से बायोमास (गोबर की स्लरी) डाला जाता है और गैस की आपूर्ति निरंतर (Continuous) होती रहती है।
- संयंत्र बिना रुके लगातार चलता है और केवल रखरखाव या गाद (Sludge) निकालने के लिए रोका जाता है। भारतीय ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यही आदर्श है।
- (A) बैच प्रकार का संयंत्र (Batch Type Biogas Plant):
- गैस संग्रहण (Gas Holder) की संरचना के आधार पर:
- (A) फ्लोटिंग गैस होल्डर संयंत्र (Floating Gas Holder Plant): जैसे—KVIC मॉडल, प्रगति मॉडल, गणेश मॉडल।
- (B) फिक्स्ड डोम संयंत्र (Fixed Dome Biogas Plant): जैसे—जनता मॉडल (PRAD, 1978) एवं दीनबंधु मॉडल (AFPRO, 1984)।
07 महत्वपूर्ण सिद्धांत एवं समीकरण (Important Principles and Concepts)
- स्थिर दाब बनाम परिवर्ती दाब सिद्धांत (Constant Pressure vs Variable Pressure Principle): फ्लोटिंग ड्रम (KVIC) संयंत्र में गैस होल्डर ड्रम अपने भार के बराबर निरंतर दाब डालते हुए ऊपर-नीचे तैरता है, इसलिए गैस स्थिर दाब (Constant pressure) पर मिलती है। इसके विपरीत, फिक्स्ड डोम (जनता/दीनबंधु) संयंत्र में आयतन स्थिर होने के कारण गैस जमा होने पर स्लरी आउटलेट चैंबर में ऊपर चढ़ती है और गैस परिवर्ती दाब (Variable pressure) पर प्राप्त होती है।
- दीनबंधु का चाप-गुंबद सिद्धांत (Arch/Spherical Segment Principle): दीनबंधु मॉडल में दो गोलाकार खंडों (कॉलर पर टिकी कटोरेनुमा नींव और गुंबद) को जोड़ा जाता है, जिससे सतह क्षेत्रफल कम होता है, भार समान रूप से वितरित होता है और जनता व KVIC की तुलना में निर्माण लागत 30–45% कम आती है।
08 वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उदाहरण व गणनाएँ (Scientific & Practical Examples)
व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक उदाहरण: राजस्थान एवं विभिन्न जलवायु क्षेत्रों में संयंत्र चयन
- राजस्थान के लिए HRT का चयन: राजस्थान का औसत वार्षिक तापमान 15°C से 20°C के मध्यम वर्ग में आने (विशेषकर शीतकाल को ध्यान में रखते हुए) के कारण यहाँ बायोगैस संयंत्रों के डिजाइन के लिए 40 दिन का HRT (Hydraulic Retention Time) अनुशंसित किया गया है।
- ईंधन दक्षता की तुलना: यदि एक किसान परिवार गोबर के उपले (2093 kcal/kg, मात्र 11% तापीय दक्षता) जलाता है, तो 89% ऊष्मा व्यर्थ जाती है और धुआँ व खाद की हानि होती है। उसी गोबर को दीनबंधु या KVIC बायोगैस संयंत्र में डालने पर 4713 kcal/m³ की स्वच्छ गैस के साथ-साथ उच्च कोटि की जैविक खाद भी प्राप्त होती है।
09 तुलनात्मक सारणियाँ (Comparative Tables)
तुलनात्मक सारणी 3.1: फ्लोटिंग ड्रम (KVIC) बनाम फिक्स्ड डोम (जनता / दीनबंधु) बायोगैस संयंत्र
| तुलना का बिंदु (Feature) | फ्लोटिंग ड्रम संयंत्र (KVIC Model – 1961) | फिक्स्ड डोम संयंत्र (Janata 1978 / Deenbandhu 1984) |
|---|---|---|
| गैस होल्डर (Gas Holder) | उल्टा तैरता हुआ स्टील का ड्रम (Inverted movable steel drum)। | ईंट व सीमेंट का स्थायी भूमिगत गुंबद (Fixed masonry dome)। |
| गैस का दाब (Gas Pressure) | स्थिर दाब (Constant pressure)। | परिवर्ती दाब (Variable pressure — गैस की मात्रा के अनुसार)। |
| प्रारंभिक एवं रखरखाव लागत | स्टील ड्रम के कारण प्रारंभिक लागत उच्च; ड्रम में जंग (Corrosion) लगने से हर साल पेंटिंग आवश्यक। | कोई स्टील भाग न होने से निर्माण लागत कम (विशेषकर दीनबंधु सबसे सस्ता) एवं रखरखाव खर्च न्यूनतम। |
| संयंत्र की आयु (Life Span) | तुलनात्मक रूप से कम (स्टील ड्रम की आयु 8-12 वर्ष)। | अधिक दीर्घायु (30 वर्ष से अधिक)। |
| ऊपर की भूमि का उपयोग | स्टील ड्रम जमीन के ऊपर दिखता है, ऊपर का स्थान घिरता है। | पूर्णतः भूमिगत होने से ऊपर की जमीन का उपयोग किया जा सकता है व सर्दियों में तापमान स्थिर रहता है। |
तुलनात्मक सारणी 3.2: भारत के प्रमुख बायोगैस मॉडलों का सारांश
| संयंत्र मॉडल (Model Name) | विकास वर्ष एवं संस्था / वैज्ञानिक | प्रकार एवं मुख्य संरचनात्मक विशेषता |
|---|---|---|
| प्रथम प्रायोगिक संयंत्र | 1941 — IARI, नई दिल्ली | भारत में स्थापित प्रथम बायोगैस संयंत्र। |
| गोबर गैस / KVIC मॉडल | 1956 (जशु भाई जे. पटेल) / 1961 (KVIC पेटेंट) | फ्लोटिंग स्टील ड्रम + गहरा बेलनाकार डाइजेस्टर (>3 m³ पर विभाजन दीवार)। |
| जनता मॉडल (Janata) | 1978 — PRAD (लखनऊ) | फिक्स्ड डोम; बेलनाकार डाइजेस्टर + चौड़े चिनाई वाले इनलेट व आउटलेट चैंबर। |
| दीनबंधु मॉडल (Deenbandhu) | 1984 — AFPRO (नई दिल्ली) | फिक्स्ड डोम (जनता का उन्नत रूप); कटोरेनुमा नींव + पाइप इनलेट + गोलाकार गुंबद। |
| प्रगति मॉडल (Pragati) | UNARP / KVIC | फ्लोटिंग ड्रम + अर्धगोलाकार (Hemisphere) डाइजेस्टर। |
| गणेश मॉडल (Ganesh) | GBPUAT / स्थानीय नवाचार | फ्लोटिंग ड्रम; डाइजेस्टर एंगुलर स्टील, बाँस और प्लास्टिक शीट से निर्मित। |
10 महत्वपूर्ण सूत्र एवं तकनीकी मानक (Formulas & Key Metrics)
महत्वपूर्ण मानक मान एवं तापीय दक्षता आँकड़े (Key Quantitative Figures)
- बायोगैस का संघटन: , , सूक्ष्म मात्रा में व जलवाष्प।
- बायोगैस का कैलोरी मान:
- गोबर के उपले (Dung Cake): कैलोरी मान = | चूल्हे में तापीय दक्षता =
- जलाऊ लकड़ी (Firewood): कैलोरी मान = | चूल्हे में तापीय दक्षता =
- HRT (Hydraulic Retention Time): | |
- स्लरी मिश्रण अनुपात:
11 व्याख्यान-विशिष्ट माइंड मैप (Lecture-Specific Mind Map)
Lecture 03 Mind Map: विभिन्न प्रकार के बायोगैस संयंत्रों का वर्गीकरण एवं संरचना
- बायोगैस संयंत्र (Biogas Plants: CH₄ 55-65%, CV 4713 kcal/m³, प्रथम संयंत्र 1941 IARI)
- चार्जिंग के आधार पर (By Feeding Mode)
- बैच प्रकार (Batch Type): 50-60 दिन अंतराल पर चार्जिंग, 8-10 दिन बाद गैस प्रारंभ, 40-50 दिन आपूर्ति, यूरोपीय देशों में प्रचलित
- सतत प्रकार (Continuous Type): प्रतिदिन स्लरी (1:1) भराई, निरंतर गैस आपूर्ति, HRT: 30 दिन (>20°C), 40 दिन (15-20°C राजस्थान), 55 दिन (<15°C)
- फिक्स्ड डोम संयंत्र (Fixed Dome Plants – भूमिगत गुंबद)
- जनता मॉडल (Janata – 1978, PRAD): 5 भाग — मिक्सिंग टैंक, ढलानदार इनलेट चैंबर, गुंबदनुमा डाइजेस्टर, गैस आउटलेट वाल्व, आउटलेट व ओवरफ्लो टैंक
- दीनबंधु मॉडल (Deenbandhu – 1984, AFPRO): 6 घटक — कॉलर युक्त कटोरेनुमा नींव, 2-भाग डोम डाइजेस्टर, मिक्सिंग टैंक, इनलेट पाइप, गैस निप्पल पाइप, 2-भाग आयताकार आउटलेट टैंक
- फ्लोटिंग ड्रम संयंत्र (Floating Gas Holder Plants – गतिशील ड्रम)
- KVIC मॉडल (1956 जशु भाई पटेल / 1961 KVIC): बेलनाकार डाइजेस्टर (>3 m³ में विभाजन दीवार), इनलेट/आउटलेट सीमेंट पाइप, उल्टा स्टील ड्रम, लोहे का गाइड फ्रेम
- अन्य मॉडल: प्रगति मॉडल (अर्धगोलाकार डाइजेस्टर), गणेश मॉडल (स्टील, बाँस व प्लास्टिक फॉयल), प्री-फैब्रिकेटेड RCC एवं FRP ड्रम मॉडल
- चार्जिंग के आधार पर (By Feeding Mode)
12 प्रक्रिया प्रवाह चित्र एवं आरेख (Flowcharts & Visual Diagrams)
प्रक्रिया प्रवाह चित्र (Process Flowchart): फिक्स्ड डोम बायोगैस संयंत्र (जनता / दीनबंधु) में स्लरी व गैस प्रवाह
(गोबर + पानी = 1:1 स्लरी) ➔ 2. इनलेट चैंबर / पाइप
(गुरुत्व द्वारा डाइजेस्टर में प्रवेश) ➔ 3. डाइजेस्टर (HRT 30-55 दिन)
(अवायवीय जीवाणु किण्वन) ➔ 4. गुंबद में गैस संचय
(गैस दाब में वृद्धि) ➔ 5. आउटलेट व ओवरफ्लो टैंक
(दाब से पचित स्लरी बाहर ➔ खाद) ➔ 6. गैस आउटलेट वाल्व
(पाइपलाइन से रसोई चूल्हे तक गैस)
13 महत्वपूर्ण तथ्य एवं परीक्षा टिप्स (Important Facts & Exam Tips)
- परीक्षा के लिए 4 ऐतिहासिक वर्ष और संस्थाएँ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं: 1941 (IARI नई दिल्ली – प्रथम प्लांट), 1956 (जशु भाई जे. पटेल – प्रथम फ्लोटिंग ड्रम गोबर गैस प्लांट), 1961 (KVIC द्वारा पेटेंट), 1978 (PRAD द्वारा जनता मॉडल), और 1984 (AFPRO द्वारा दीनबंधु मॉडल)।
- राजस्थान के लिए बायोगैस संयंत्र का अनुशंसित HRT (Hydraulic Retention Time) ’40 दिन’ (15–20°C तापमान जोन) है।
- KVIC संयंत्र में यदि क्षमता 3 घन मीटर (3 m³) से अधिक हो, तो डाइजेस्टर के बीच में एक विभाजन दीवार (Partition wall) बनाई जाती है।
- प्रगति मॉडल (Pragati Model) का डाइजेस्टर ‘अर्धगोलाकार’ (Hemisphere) होता है, जबकि KVIC का ‘बेलनाकार’ (Cylindrical) होता है।
- गोबर के उपलों की चूल्हे में तापीय दक्षता मात्र 11% (CV 2093 kcal/kg) और लकड़ी की 17.3% (CV 4978 kcal/kg) होती है, जबकि बायोगैस का कैलोरी मान 4713 kcal/m³ होता है।
14 त्वरित पुनरावृत्ति सारांश (Quick Revision Panel)
- बायोगैस: 55–65% + 30–40% | कैलोरी मान: ।
- बैच प्लांट: 50–60 दिन अंतराल पर चार्जिंग, 8–10 दिन बाद गैस शुरू, 40–50 दिन तक गैस; यूरोप में प्रचलित।
- HRT: ; ; ।
- जनता (1978, PRAD) बनाम दीनबंधु (1984, AFPRO): दोनों फिक्स्ड डोम हैं; दीनबंधु में इनलेट चैंबर की जगह पाइप और कटोरेनुमा नींव होती है।
- गाइड फ्रेम (KVIC): ड्रम को बाहरी दीवार छूने व तिरछा होने से बचाता है तथा मरम्मत हेतु निकालने में सहायक है।
15 बहुविकल्पीय प्रश्न — उत्तर एवं व्याख्या सहित (10 MCQs with Answers)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
उत्तर एवं व्याख्या देखें (Show Answer & Explanation)
16 अति-लघु, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न व वन-लाइनर्स (Exam Question Bank)
(A) 5 महत्वपूर्ण वन-लाइनर्स (5 Important Exam One-Liners)
- बायोगैस में 55–65% मीथेन (CH₄) और 30–40% कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) होती है तथा इसका कैलोरी मान 4713 kcal/m³ होता है।
- भारत में प्रथम बायोगैस संयंत्र 1941 में IARI नई दिल्ली में लगा तथा 1956 में जशु भाई जे. पटेल ने पहला फ्लोटिंग ड्रम ‘गोबर गैस प्लांट’ बनाया।
- जनता बायोगैस मॉडल 1978 में PRAD द्वारा और दीनबंधु बायोगैस मॉडल 1984 में AFPRO द्वारा विकसित किया गया।
- राजस्थान के लिए बायोगैस संयंत्र का अनुशंसित हाइड्रोलिक रिटेंशन टाइम (HRT) 40 दिन है।
- 3 घन मीटर (3 m³) से अधिक क्षमता वाले KVIC बायोगैस संयंत्र के डाइजेस्टर में बीच में एक विभाजन दीवार (Partition wall) बनाई जाती है।
(B) 5 अति-लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Very Short Answer Questions)
(C) 5 लघु उत्तरीय प्रश्न (5 Short Answer Questions)
(D) 3 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (3 Long Answer Questions)
आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध AGENGG 311 notes। पुराने उपकरणों के model-specific data को वर्तमान सार्वभौमिक specification न मानें।





