गेहूँ की खेती: रबी POP व किसान कार्ययोजना | जोधपुर संदर्भ
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रबी • अनाज • जोधपुर खंड
स्रोत का वर्ष 2016-17 है, वर्तमान मौसम की आधिकारिक POP नहीं। नीचे पुरानी क्षेत्रीय पुस्तक की खेती-संबंधी जानकारी सरल रूप में दी गई है। किस्म की उपलब्धता, बुवाई का समय, पोषण और उपचार अपने खेत की मिट्टी, पानी व वर्तमान स्थानीय सलाह से मिलाएं। संकलन: 29 अक्टूबर 2026; इसे नई तकनीकी सिफारिश जारी होने की तारीख न समझें।
सीधे पढ़ें: खेत व किस्म · बुवाई · पोषण · पानी · रोग-कीट · कटाई · स्रोत
1. खेत, मिट्टी और किस्म चुनें
अच्छे जल निकास वाली दोमट भूमि चुनें। हल्की, भारी और लवण प्रभावित मिट्टी के लिए एक ही किस्म उपयुक्त नहीं होती। पुस्तक में राज 3077, राज 3765, राज 4037 और HD 2967 जैसे विकल्प दिए हैं; इन्हें वर्तमान उपलब्धता व स्थानीय अनुमोदन से मिलाएं।
2. बुवाई का समय और खेत की तैयारी
भारी मिट्टी में सामान्य बुवाई नवंबर का पहला पखवाड़ा है। हल्की मिट्टी व देर से बुवाई का समय अलग है; नवंबर के अंत से दिसंबर के पहले सप्ताह वाली स्थिति को सामान्य समय न मानें।
3. बीज, दूरी और पौध संख्या
सामान्य सिंचित भारी भूमि के लिए पुस्तक में 100 किग्रा/हेक्टेयर और 20-25 सेमी कतार दूरी दी है। देर से बुवाई में बीज दर बढ़ती है। सिंचित खेत में बीज 5 सेमी से अधिक गहरा न रखें।
4. खाद और पोषण की योजना
सिंचित फसल में आधी नत्रजन और पूरी फॉस्फेट-पोटाश बुवाई में, बची नत्रजन पहली-दूसरी सिंचाई के साथ दें। कुल मात्रा मिट्टी परीक्षण, पानी और किस्म के अनुसार तय करें; लंबी किस्म में बौनी किस्म की मात्रा न दोहराएं।
5. सिंचाई और नमी प्रबंधन
पहली सिंचाई शीर्ष-जड़ बनने की अवस्था के लिए विशेष महत्वपूर्ण है। बाद में कल्ले, गांठ, बाली और दाना बनने की अवस्थाओं में नमी देखें। हल्की भूमि में पानी जल्दी निकलता है; केवल तय दिन गिनकर पानी न दें।
6. निराई-गुड़ाई और खरपतवार
पहली सिंचाई के बाद उपयुक्त नमी पर निराई करें। गुल्ली डंडा और जंगली जई के बीज बनने से पहले पौधे निकालें। लगातार गेहूँ लेने वाले खेत में फसल चक्र अपनाएं।
7. रोग-कीट की पहचान और प्रबंधन
रोली के रंगीन फफोले, कंडवे वाली बालियां, पीले बौने पौधे व जड़ों की गांठें देखें। प्रतिरोधी किस्म, साफ बीज और गैर-पोषक फसल चक्र प्राथमिक उपाय हैं। मोल्या का संदेह हो तो जड़-मिट्टी का नमूना जाँचें।
8. कटाई, सुखाई और भंडारण
दाने कड़े और बालियां सूखी होने पर कटाई करें। साफ जगह मड़ाई-सुखाई करके ही भंडारण करें। बुवाई वाला उपचारित बीज खाने या पशु आहार में न मिलाएं।
9. इस फसल में खास ध्यान
पानी सीमित हो तो पूरे खेत में गेहूँ बढ़ाने के बजाय स्थानीय सलाह से जौ या सरसों जैसे विकल्प की तुलना करें।
खेत में काम करने से पहले यह जाँचें
- बीज का नाम, बिल, लॉट और अंकुरण जाँचें। किस्म के लिए क्षेत्र व सिंचाई की अनुकूलता पूछें।
- मिट्टी परीक्षण, पिछली फसल की खाद, उपलब्ध पानी और मौसम देखकर खेत की लिखित योजना बनाएं।
- जहाँ किग्रा/हेक्टेयर लिखा है वह प्रति हेक्टेयर मात्रा है। उर्वरक पोषक तत्व की मात्रा को यूरिया/DAP की बोरी का वजन न मानें; उत्पाद की संरचना अनुसार स्थानीय विशेषज्ञ से गणना कराएं।
- खेत में कीट/रोग की तस्वीर के साथ फसल की उम्र और प्रभावित क्षेत्र नोट करें। बिना पहचान कई दवाओं को मिलाकर प्रयोग न करें।
पुराने रसायन संबंधी निर्देशों के बारे में
इन पुरानी पुस्तकों में कुछ ऐसे रसायन, उपचार और घरेलू मिश्रण भी हैं जिन्हें आज की अनुमति मानकर उपयोग नहीं करना चाहिए। यहाँ पुराने कीटनाशी/खरपतवारनाशी/कवकनाशी की दरें और तेजाब या धूमन की घरेलू विधियां नहीं दोहराई गई हैं। किसी उत्पाद की वर्तमान फसल-कीट अनुमति, formulation, label मात्रा, सुरक्षा और कटाई/चारा प्रतीक्षा अवधि की पुष्टि स्थानीय कृषि विभाग/KVK से करें। जैविक उत्पाद भी अपने-आप हानिरहित या प्रमाणित नहीं होते।
मूल स्रोत और संदर्भ
जोधपुर रबी फसलों की उन्नत कृषि विधियां, 2016-17। प्रकाशक: संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार), खंड जोधपुर; तकनीकी आधार: कृषि अनुसंधान केन्द्र, मंडोर व क्षेत्रीय सिफारिशें। संबंधित मुद्रित पृष्ठ: 7-21। यह स्वतंत्र सरल संकलन है, मूल विभाग का नया परिपत्र नहीं।
मूल रबी PDF देखें (लगभग 38 MB, पुराना संदर्भ)। PDF में पुरानी रसायन सलाह वर्तमान अनुमति नहीं है।





