GPB 311 Lecture 12: स्व-परागित, पर-परागित एवं वानस्पतिक रूप से प्रवर्धित खरीफ फसलों में बीज उत्पादन तकनीक

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GPB 311 · Kharif Crop Improvement Smart Notes
LECTURE 12 / 15 · GPB 311

स्व-परागित, पर-परागित एवं वानस्पतिक रूप से प्रवर्धित खरीफ फसलों में बीज उत्पादन तकनीक

Seed Production Technology in Self-Pollinated, Cross-Pollinated, and Vegetatively Propagated Kharif Crops

Seed Classes (Nucleus, Breeder, Foundation, Certified), Isolation Distance, Roguing, Clonal Seed Production

विषय सूची · Quick Navigationअधिगम उद्देश्य · Learning Objectivesप्रस्तावना · Introductionमहत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitionsवर्गीकरण · Classificationमहत्वपूर्ण सिद्धांत · Principlesफसल सुधार के विस्तृत विषय · Detailed Topicsतुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tablesसूत्र एवं गणनाएँ · Calculationsमाइंड मैप · Mind Mapप्रवाह चित्र · Flowchartपरीक्षा टिप्स · Exam Tipsत्वरित पुनरावृत्ति · Quick RevisionMCQs — उत्तर एवं व्याख्याअति लघु उत्तरीय प्रश्नलघु उत्तरीय प्रश्नदीर्घ उत्तरीय प्रश्नपरीक्षा वन-लाइनर्स
Original syllabus: Seed production technology in self pollinated, cross pollinated and vegetatively propagated crops of Kharif.
अध्ययन सामग्री: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध GPB 311 notes पर आधारित। किस्मों एवं तकनीकों के उदाहरणों को उनके स्रोत और क्षेत्रीय संदर्भ में पढ़ें।

अधिगम उद्देश्य · Learning Objectives

  • भारतीय बीज कार्यक्रम की चार पीढ़ियों—केंद्रक बीज (Nucleus Seed), प्रजनक बीज (Breeder Seed – सुनहरा पीला टैग), आधार बीज (Foundation Seed – सफेद टैग) और प्रमाणित बीज (Certified Seed – नीला टैग)—तथा पंजीकृत बीज (बैंगनी टैग) व ट्रुथफुल लेबल्ड (ओपल ग्रीन टैग) को समझना।
  • स्व-परागित (धान, मूँग, उड़द, सोयाबीन, मूँगफली), बहुधा पर-परागित (अरहर, कपास, तिल, बैंगन, भिंडी) और पर-परागित (मक्का, बाजरा, अरंडी, कद्दू कुल) खरीफ फसलों के आनुवंशिक एवं भौतिक बीज उत्पादन सिद्धांतों (Isolation distance, Roguing, Field inspection) की तुलना करना।
  • वानस्पतिक रूप से प्रवर्धित खरीफ फसलों (गन्ना, अदरक, हल्दी, परवल, शकरकंद, कसावा) में रोग-मुक्त क्लोनल बीज उत्पादन और टिश्यू कल्चर माइक्रोप्रोपेगेशन के मानकों का अध्ययन करना।

प्रस्तावना · Introduction

किसी भी उन्नत किस्म या संकर का लाभ किसानों तक तभी पहुँचता है जब उन्हें उच्च आनुवंशिक शुद्धता (Genetic Purity) और उच्च अंकुरण क्षमता वाला गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध हो। भारत में राष्ट्रीय बीज निगम (NSC, 1963), भारतीय बीज अधिनियम (Seed Act, 1966 — 1969 से लागू) और भारतीय न्यूनतम बीज प्रमाणीकरण मानक (IMSCS, 1971; संशोधित 2013) के अंतर्गत स्व-परागित, पर-परागित और वानस्पतिक फसलों के बीज गुणन के सख्त वैज्ञानिक नियम निर्धारित किए गए हैं।

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitions

केंद्रक बीज एवं प्रजनक बीज (Nucleus Seed & Breeder Seed)

'केंद्रक बीज' मूल प्रजनक द्वारा बाली-से-पंक्ति (Ear-to-Row / Progeny row) विधि से तैयार 100% आनुवंशिक रूप से शुद्ध प्रारंभिक बीज है (इस पर कोई प्रमाणीकरण टैग नहीं लगता); इसके गुणन से बना 'प्रजनक बीज' (सुनहरा पीला टैग, 100% शुद्धता) प्रजनक के प्रत्यक्ष निरीक्षण में तैयार होता है।

पृथक्करण दूरी (Isolation Distance)

पर-परागण और यांत्रिक मिश्रण को रोकने के लिए बीज उत्पादन भूखंड और उसी फसल के अन्य खेतों के बीच रखी जाने वाली न्यूनतम सुरक्षित दूरी (मीटर में)।

अवांछित पौधे निकालना (Roguing)

बीज फसल में फूल आने से पहले, फूल आते समय और पकने पर खेत का निरीक्षण कर भिन्न किस्म के पौधों (Off-types), जंगली पौधों, आपत्तिजनक खरपतवारों और बीज-जनित रोगग्रस्त पौधों को जड़ से उखाड़कर हटाना।

ग्रो-आउट टेस्ट (Grow-Out Test – GOT)

किसी बीज लॉट (विशेषकर कपास, अरंडी, बाजरा व सब्जी संकरों के प्रमाणित व आधार बीज) की वास्तविक आनुवंशिक शुद्धता (Genetic purity %) की जाँच के लिए 400 पौधों को खेत में उगाकर उनके आनुवंशिक लक्षणों का परीक्षण करना।

वर्गीकरण · Classification

भारत में बीज की श्रेणियाँ, टैग का रंग, आकार एवं आनुवंशिक शुद्धता (Seed Classes & Tag Colors)

1. केंद्रक बीज (Nucleus Seed): मूल प्रजनक के पास — कोई आधिकारिक टैग नहीं; आनुवंशिक शुद्धता = 100%।
2. प्रजनक बीज (Breeder Seed): सुनहरा पीला टैग (Golden Yellow Tag; आकार: 12 × 6 cm, प्रजनक द्वारा हस्ताक्षरित; प्रमाणीकरण एजेंसी के अधीन नहीं आता!); आनुवंशिक शुद्धता = 100%।
3. आधार बीज (Foundation Seed — Stage I & II): सफेद टैग (White Tag; आकार: 15 × 7.5 cm); प्रजनक बीज की संतति; आनुवंशिक शुद्धता = ≥ 99.0% से 99.5%।
4. पंजीकृत बीज (Registered Seed — भारत में प्रचलित नहीं, USA में प्रचलित): बैंगनी टैग (Purple Tag; 15 × 7.5 cm)।
5. प्रमाणित बीज (Certified Seed): नीला टैग (Azure Blue Tag; आकार: 15 × 7.5 cm); किसानों को बुवाई हेतु दिया जाने वाला बीज; आनुवंशिक शुद्धता = ≥ 98.0% से 99.0% (संकरों में ≥ 95%)।
6. सत्यता लेबल बीज (Truthfully Labelled – TL Seed): ओपल हरा टैग (Opal Green Tag; आकार: 15 × 10 cm — इसमें प्रमाणीकरण स्वैच्छिक होता है किंतु बीज अधिनियम के तहत अंकुरण व भौतिक शुद्धता अनिवार्य है)।

महत्वपूर्ण सिद्धांत · Principles

  • आनुवंशिक अवनति के कारण (Causes of Varietal Deterioration – Kadam, 1942): किसी भी किस्म की आनुवंशिक शुद्धता नष्ट होने के 7 प्रमुख कारण हैं—(1) विकासात्मक भिन्नता (Developmental variation), (2) यांत्रिक मिश्रण (Mechanical admixture — थ्रेशर, बोरी या गोदाम में; स्व-परागित फसलों में सबसे मुख्य कारण!), (3) प्राकृतिक पर-परागण (Natural crossing — पर-परागित फसलों में सबसे मुख्य कारण!), (4) अवशिष्ट विसंयोजन (Minor genetic variations), (5) चयनात्मक रोग प्रभाव, (6) उत्परिवर्तन और (7) कोशिका-आनुवंशिक अनियमितताएँ।
  • केंद्रक बीज रखरखाव की 'हैरिंगटन / बाली-से-पंक्ति विधि' (Nucleus Seed Maintenance in Self-Pollinated Crops): स्व-परागित किस्म (जैसे धान, मूँग, सोयाबीन) से 500 सच्चे प्रारूपी एकल पौधे (True-to-type single plants) चुने जाते हैं। उनके बीजों को अलग-अलग 500 एकल पादप संतति कतारों (Progeny rows / Ear-to-row) में उगाया जाता है; यदि किसी भी कतार में एक भी भिन्न पौधा (Off-type) या रोग दिखे तो उस पूरी की पूरी कतार को ही निरस्त कर दिया जाता है! शेष पूर्णतः एकसमान कतारों के बीज को मिलाकर 'Nucleus Seed' बनता है।

फसल सुधार के विस्तृत विषय · Detailed Topics

1. Seed Production in Self-Pollinated & Often Cross-Pollinated Kharif Crops (स्व-परागित एवं बहुधा पर-परागित खरीफ फसलों में बीज उत्पादन)
Self-pollinated: Rice (धान), Groundnut (मूँगफली), Soybean (सोयाबीन), Mung, Urd, Moth, Cowpea, Guar, Ragi, Jute | Often Cross-pollinated: Pigeonpea (अरहर), Cotton (कपास), Sesame (तिल), Brinjal (बैंगन), Okra (भिंडी) · विशिष्ट जानकारी: प्रमुख सिद्धांत: स्व-परागित फसलों में पराग संदूषण बहुत कम होने से पृथक्करण दूरी कम (3 मीटर) होती है और मुख्य ध्यान 'यांत्रिक मिश्रण' व 'बीज-जनित रोगों' को रोकने पर होता है।

महत्व: स्व-परागित फसलों में बीज प्रतिस्थापन दर (Seed Replacement Rate – SRR) सामान्यतः 33% (हर 3 वर्ष में नया प्रमाणित बीज लेना) अनुशंसित है।

महत्वपूर्ण बिंदु · Key Concepts
  • 1. स्व-परागित फसलों (धान, सोयाबीन, मूँगफली, मूँग, उड़द, मोठ, लोबिया, ग्वार, रागी) के मानक:
    • पृथक्करण दूरी (Isolation Distance): आधार बीज (Foundation Seed – FS) = 3 मीटर एवं प्रमाणित बीज (Certified Seed – CS) = 3 मीटर! (अपवाद: लोबिया में FS = 10 m, CS = 5 m; तथा धान व जौ के लूज स्मट ग्रस्त खेत से दूरी = 150 मीटर)।
    • न्यूनतम खेत निरीक्षण (Minimum Field Inspections): बुवाई से कटाई के बीच कम से कम 2 निरीक्षण (फूल आने पर एवं पकने पर)।
    • अधिकतम अनुमेय ऑफ-टाइप पौधे (Max permitted off-types at final inspection): FS में 0.05% (1 इन 2000 पौधे) एवं CS में 0.10% (1 इन 1000 पौधे)।
  • 2. बहुधा पर-परागित फसलों (अरहर, कपास, तिल, बैंगन, भिंडी) की किस्मों (Varieties/OPVs) के मानक:
    • अरहर (Pigeonpea varieties): FS = 200 मीटर, CS = 100 मीटर।
    • कपास (Cotton varieties): FS = 50 मीटर, CS = 30 मीटर।
    • तिल (Sesame varieties): FS = 100 मीटर, CS = 50 मीटर।
    • बैंगन (Brinjal varieties): FS = 200 मीटर, CS = 100 मीटर।
    • भिंडी (Okra varieties — जंगली भिंडी से दूरी सहित): FS = 400 मीटर, CS = 200 मीटर (क्योंकि भिंडी में YVMV व कीट परागण दोनों का जोखिम अधिक होता है!)।
    • निरीक्षण: कम से कम 3 खेत निरीक्षण (फूल आने से पूर्व, 50% पुष्पन पर एवं फल पकने पर)।
सुधार रणनीति · Breeding Approach
  • धान के बीज उत्पादन में 'बेरूआ / जंगली लाल धान' (Weedy/Red rice – Oryza sativa f. spontanea) एक आपत्तिजनक खरपतवार (Objectionable weed) है जिसकी अधिकतम सीमा FS में 0.01% और CS में 0.05% है।
आनुवंशिक एवं जैविक विशेषताएँ

बीज मानक (Seed Standards in Lab): न्यूनतम अंकुरण प्रतिशत (Minimum Germination %) — मक्का (90%), धान व ज्वार (80%), बाजरा, मूँग, उड़द, मोठ, लोबिया, अरहर (75%), मूँगफली व सोयाबीन (70% — क्योंकि ये जल्दी अंकुरण खोते हैं!), कपास एवं भिंडी (65% — कठोर बीजचोल के कारण सबसे कम मानक!)।

जैविकी एवं उत्पादन संदर्भ

भौतिक शुद्धता (Physical Purity): तिल (97%) और मूँगफली (96%) को छोड़कर लगभग सभी फसलों में न्यूनतम भौतिक शुद्धता 98.0% होनी अनिवार्य है।

पुष्पन, परागण एवं उपयोग संदर्भ

कटाई एवं गहाई के समय नमी (Safe Moisture Content for Storage): अनाज व दलहनों में 10–12%, तिलहनों (मूँगफली, सोयाबीन, तिल) में 7–9% और वायुरोधी पैकेट (Vapor-proof container) के लिए 5–6%।

Exam Key: स्व-परागित फसलों (धान, सोयाबीन, मूँगफली, मूँग, उड़द) की पृथक्करण दूरी: FS = 3 m, CS = 3 m | अरहर: 200/100 m | कपास किस्में: 50/30 m | भिंडी किस्में: 400/200 m | न्यूनतम अंकुरण: मक्का (90%), धान (80%), दलहन/बाजरा (75%), सोयाबीन/मूँगफली (70%), कपास/भिंडी (65%)।
2. Seed Production in Cross-Pollinated Open-Pollinated Varieties / Composites & Synthetics (पर-परागित फसलों की किस्मों में बीज उत्पादन)
Cross-pollinated Kharif Crops: Maize Composites (मक्का कम्पोजिट), Pearl Millet OPVs (बाजरा किस्में), Castor Varieties (अरंडी), Cucurbits (कद्दू वर्गीय किस्में) · विशिष्ट जानकारी: प्रमुख सिद्धांत: पर-परागित फसलों में हवा या मधुमक्खियों द्वारा परागकण सैकड़ों मीटर दूर तक उड़कर जाते हैं, अतः इनमें उच्च पृथक्करण दूरी (200 से 1000 मीटर) और सामूहिक चयन (Mass selection / Sib-pollination) द्वारा वंशावली संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है।

महत्व: पर-परागित खुली परागित किस्मों (OPVs/Composites) में अत्यधिक कड़ा एकल-पादप चयन करने से 'अंतःप्रजनन अवसाद' (Inbreeding depression) आ सकता है, इसलिए कम से कम 2500–5000 पौधों की समष्टि से केंद्रक बीज तैयार किया जाता है।

महत्वपूर्ण बिंदु · Key Concepts
  • 1. पृथक्करण दूरी (Isolation Distance for Open-Pollinated Varieties / Composites):
    • मक्का कम्पोजिट एवं इनब्रेड्स (Maize Composites/Inbreds): FS = 400 मीटर, CS = 200 मीटर (यदि पास के खेत की मक्का के दाने का रंग या भ्रूणपोष प्रकार भिन्न हो तो दूरी 400/300 मीटर रखी जाती है; तथा 'समय पृथक्करण / Time Isolation' केवल प्रमाणित बीज में कम से कम 4 सप्ताह के अंतराल पर अनुमत है, आधार बीज में समय पृथक्करण अनुमत नहीं है!)।
    • बाजरा कम्पोजिट (Pearl Millet OPVs like WCC-75, ICTP 8203): FS = 400 मीटर, CS = 200 मीटर।
    • अरंडी किस्में एवं संकर (Castor): FS = 300 मीटर (संकर हेतु 600 m), CS = 150 मीटर (संकर हेतु 300 m)।
    • सभी कद्दू वर्गीय सब्जियाँ (Cucurbits Varieties — खीरा, लौकी, करेला, तरबूज, खरबूजा, तोरई, कद्दू): FS = 800 से 1000 मीटर, CS = 400 से 500 मीटर! (जंगली कड़वे कद्दू जैसे Citrullus colocynthis व Cucumis hardwickii से भी यही दूरी अनिवार्य है अन्यथा फलों में विषैला कुकरबिटासिन आ जाएगा!)।
  • 2. कद्दू वर्गीय फसलों में बीज निष्कर्षण (Seed Extraction in Cucurbits):
    • किण्वन विधि (Fermentation Method): खीरा और खरबूजे के पके फलों के गूदे को बीज सहित लकड़ी/प्लास्टिक के बर्तन में 24–48 घंटे रखकर किण्वित करते हैं जिससे बीज के चारों ओर की श्लेष्मक झिल्ली गल जाती है और अच्छे भारी बीज पानी में नीचे बैठ जाते हैं।
    • अम्ल विधि (Acid Method): गूदे में 10–15 ml वाणिज्यिक हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) प्रति किलो गूदा मिलाकर 20–30 मिनट हिलाने से बीज तुरंत साफ व चमकदार हो जाते हैं।
सुधार रणनीति · Breeding Approach
  • पृथक्करण दूरी कम करने हेतु मक्का में खेत के चारों ओर नर पितृ की अतिरिक्त सीमांत कतारें (Border rows — प्रत्येक 1 सीमांत कतार से 10–15 मीटर पृथक्करण दूरी में छूट मिलती है) लगाई जा सकती हैं।
आनुवंशिक एवं जैविक विशेषताएँ

मक्का व बाजरा के कम्पोजिट किस्मों के केंद्रक बीज रखरखाव में 'आधा-भाई परिवार चयन' (Half-sib ear-to-row selection) एवं 'ग्रिड मास सिलेक्शन' (Stratified / Grid Mass Selection — Gardner, 1961) का प्रयोग किया जाता है।

जैविकी एवं उत्पादन संदर्भ

बाजरा के बीज उत्पादन में हरित बाली (Downy mildew – अधिकतम सीमा FS में 0.05%, CS में 0.10%) और अर्गट (Ergot – अधिकतम स्क्लेरोशिया सीमा FS में 0.02%, CS में 0.04%) की सख्त निगरानी की जाती है।

पुष्पन, परागण एवं उपयोग संदर्भ

कद्दू वर्गीय सब्जियों के बीज खेत में कम से कम 3 निरीक्षण (वानस्पतिक अवस्था, फूल व छोटे फल की अवस्था, और पके खाने योग्य फल की अवस्था) किए जाते हैं।

Exam Key: मक्का व बाजरा कम्पोजिट पृथक्करण दूरी: FS = 400 m, CS = 200 m | कद्दू वर्गीय सब्जियाँ (Cucurbits): FS = 800–1000 m, CS = 400–500 m | अरंडी किस्में: 300/150 m | Gardner (1961): Stratified/Grid Mass Selection।
3. Seed / Planting Material Production in Vegetatively Propagated Kharif Crops (वानस्पतिक रूप से प्रवर्धित खरीफ फसलों में बीज उत्पादन)
Sugarcane (गन्ना – Setts), Ginger & Turmeric (अदरक एवं हल्दी – Rhizomes), Pointed Gourd (परवल – Vine cuttings), Sweet Potato (शकरकंद – Vine cuttings), Cassava (कसावा – Stem stakes) · विशिष्ट जानकारी: प्रमुख सिद्धांत: वानस्पतिक रूप से प्रवर्धित (Clonally propagated) फसलों में लैंगिक पुनर्योजन नहीं होता, इसलिए इनकी आनुवंशिक शुद्धता (Genetic purity) बनाए रखना अत्यंत आसान है; किंतु इनमें सबसे बड़ा खतरा 'प्रणालीगत विषाणु, फाइटोप्लाज्मा, जीवाणु और कवक रोगों का पीढ़ी-दर-पीढ़ी संचयन' (Clonal Degeneration / Running out of varieties due to systemic pathogens) है!

महत्व: इसलिए क्लोनल फसलों के बीज उत्पादन में 'पृथक्करण दूरी' बहुत कम (5–20 मीटर, केवल यांत्रिक मिश्रण या कीट वाहक रोकने हेतु) होती है, किंतु 'ताप उपचार' (Thermotherapy), 'विभज्योतक संवर्धन' (Apical Meristem Tip Culture) और 'वायरस इंडेक्सिंग' (ELISA / PCR) सर्वोच्च प्राथमिकता होते हैं!

महत्वपूर्ण बिंदु · Key Concepts
  • 1. गन्ना (Sugarcane Three-Tier Seed Nursery Programme — IISR लखनऊ मॉडल):
    • प्रथम स्तर — प्रजनक बीज नर्सरी (Breeder Seed / Primary Nursery): गन्ने के बीज टुकड़ों (3-budded setts) को 'नम उष्ण वायु उपचार' (Moist Hot Air Therapy – MHAT: 54°C तापमान व 95–99% आर्द्रता पर 4 घंटे) या उष्ण जल उपचार (HWT: 50°C पर 2 घंटे) देकर GSD, RSD और स्मट से 100% मुक्त कर बोया जाता है।
    • द्वितीय स्तर — आधार बीज नर्सरी (Foundation Seed / Secondary Nursery): प्राथमिक नर्सरी से प्राप्त 8–10 माह के अपरिपक्व रसीले गन्नों ('Short crop') से तैयार किया जाता है।
    • तृतीय स्तर — प्रमाणित बीज नर्सरी (Certified / Commercial Seed Nursery): किसानों को वितरण हेतु। (लाल सड़न – Red rot, स्मट एवं ग्रासी शूट के लिए सहनशीलता सीमा = 0.0% अर्थात् शून्य सहनशीलता / Zero tolerance है!)।
    • आधुनिक 'सिंगल बड चिप / एसटीपी तकनीक' (Bud-chip Settling Transplanting): बीज दर 60–80 क्विंटल/हेक्टेयर से घटकर मात्र 2.5–3 क्विंटल हो जाती है और गुणन अनुपात 1:10 से बढ़कर 1:40 हो जाता है!
  • 2. अदरक एवं हल्दी (Ginger & Turmeric Rhizome Seed Production):
    • पृथक्करण दूरी: FS = 10 मीटर, CS = 5 मीटर।
    • मृदु सड़न (Pythium soft rot), जीवाणुज उकठा (Ralstonia) और सूत्रकृमि से मुक्त स्वस्थ, मोटे व कम से कम 2–3 जीवित आँखों वाले प्रकंद (25–30 g वजन) चुनें।
    • प्रकंद उपचार: कटाई के बाद भंडारण से पूर्व और बुवाई से पूर्व प्रकंदों को Metalaxyl + Mancozeb (Ridomil MZ @ 2.5 g/L) + Quinalphos (2 ml/L) के घोल में 30 मिनट डुबोकर छाया में सुखाएँ तथा गड्ढों को बुरादे व गोबर से ढककर भंडारित करें।
    • 'प्रोट्रे सिंगल-बड ट्रांसप्लांटिंग तकनीक' (TNAU / IISR कोझिकोड): 5 ग्राम के एकल कली टुकड़ों को कोकोपीट ट्रे में उगाकर रोपने से बीज प्रकंद की मात्रा 75% बचती है!
  • 3. परवल (Pointed Gourd) एवं शकरकंद (Sweet Potato):
    • परवल में 1 वर्ष पुरानी परिपक्व लता के 1–1.5 मीटर लंबे टुकड़ों ('लची') को कुंडली बनाकर रोपा जाता है अथवा मादा व नर पौधों का ऊतक संवर्धन (Micropropagation) किया जाता है।
    • शकरकंद में कंदों को पहले नर्सरी में उगाकर उनसे निकली लताओं के केवल ऊपरी व मध्य के 20–30 सेमी टुकड़ों (Vine cuttings — जिनमें शकरकंद घुन / Weevil: Cylas formicarius न हो) को मुख्य खेत में लगाया जाता है।
सुधार रणनीति · Breeding Approach
  • गन्ने के ऊतक संवर्धित पौधों (Tissue Culture Raised Settlings) में 'GSD', 'RSD' और 'Sugarcane Mosaic Virus' की ELISA व PCR द्वारा अनिवार्य जाँच (Virus Indexing) की जाती है।
आनुवंशिक एवं जैविक विशेषताएँ

शीर्ष विभज्योतक संवर्धन (Shoot Apical Meristem Culture – Morel, 1960; 0.2–0.5 mm आकार का गुंबद) द्वारा किसी भी विषाणु-संक्रमित क्लोनल किस्म को 100% वायरस-मुक्त (Virus-free) पुनर्जीवित किया जा सकता है क्योंकि विभज्योतक में संवहन ऊतक का अभाव और उच्च उपापचय व RNAi गतिविधि होती है।

जैविकी एवं उत्पादन संदर्भ

क्लोनल फसलों में उत्परिवर्तन (Somatic mutation / Bud sport) होने पर वह तुरंत स्थिर हो जाता है और कायिक प्रवर्धन द्वारा नई किस्म ('Bud-sport selection') बन जाती है।

पुष्पन, परागण एवं उपयोग संदर्भ

गन्ने में बीज फसल की कटाई सामान्य पेड़ी/चीनी फसल (12 माह) से पहले 8 से 10 माह की अवस्था में की जाती है क्योंकि युवा गन्ने की कलियों में अपचायक शर्करा (ग्लूकोज) व नमी अधिक होने से अंकुरण बहुत तेज और 90% से ऊपर होता है!

Exam Key: क्लोनल फसलों में अवनति का मुख्य कारण: प्रणालीगत रोगों (Viruses, Phytoplasma, RSD) का संचयन + गन्ने की 3-स्तरीय बीज नर्सरी (MHAT 54°C, 4 hrs; Red rot & GSD की सहनशीलता = 0.0% Zero tolerance) + बीज गन्ना कटाई: 8–10 माह (उच्च ग्लूकोज से तेज अंकुरण) + वायरस-मुक्त पौधे बनाने की विधि: Apical Meristem Culture (0.2–0.5 mm)।

तुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tables

तालिका 12.1: प्रमुख खरीफ फसलों के बीज प्रमाणीकरण मानक (Isolation Distance, Germination % & Purity % – IMSCS)

फसल का नामपरागण प्रकृतिआधार बीज पृथक्करण (FS – m)प्रमाणित बीज पृथक्करण (CS – m)न्यूनतम अंकुरण (%)न्यूनतम भौतिक शुद्धता (%)
धान (Rice – किस्म / संकर)स्व-परागित3 m (संकर: 200 m)3 m (संकर: 100 m)80%98%
सोयाबीन एवं मूँगफलीस्व-परागित3 m3 m70%98% (मूँगफली: 96%)
मूँग, उड़द, मोठ एवं ग्वारस्व-परागित3 m (लोबिया: 10 m)3 m (लोबिया: 5 m)75%98%
अरहर (Pigeonpea – किस्म / संकर)बहुधा पर-परागित200 m (संकर: 250 m)100 m (संकर: 100 m)75%98%
कपास (Cotton – किस्म / संकर)बहुधा पर-परागित50 m (संकर: 50 m)30 m (संकर: 30 m)65% (सबसे कम!)98%
तिल (Sesame) एवं बैंगनबहुधा पर-परागिततिल: 100m | बैंगन: 200mतिल: 50m | बैंगन: 100mतिल: 80% | बैंगन: 70%तिल: 97% | बैंगन: 98%
भिंडी (Okra)बहुधा पर-परागित400 m (संकर: 500 m)200 m (संकर: 250 m)65%99%
मक्का (Composites / Inbreds)पर-परागित400 m200 m (संकर: 200–300 m)90% (सर्वाधिक!)98%
बाजरा (OPVs / Hybrids)पर-परागित400 m (संकर A-line: 1000 m!)200 m (संकर: 200 m)75%98%
कद्दू वर्गीय सब्जियाँ (Cucurbits)पर-परागित800 – 1000 m400 – 500 m60% – 70%98% – 99%

सूत्र एवं गणनाएँ · Calculations

1. बीज का 'वास्तविक उपयोग मूल्य' (Real Value of Seed – RV %) एवं आवश्यक बीज दर समायोजन

Real Value of Seed (RV %) = [ भौतिक शुद्धता प्रतिशत (Physical Purity %) × अंकुरण प्रतिशत (Germination %) ] / 100

उदाहरण: यदि सोयाबीन के किसी बीज लॉट की भौतिक शुद्धता 98% है और प्रयोगशाला में उसका अंकुरण प्रतिशत 70% आता है, तो:
• बीज का वास्तविक मूल्य (Real Value) = (98 × 70) / 100 = 68.6% (नियम: यदि किसी बीज लॉट का Real Value < 70% हो, या सोयाबीन/कपास में निर्धारित मानक से कम हो, तो उसे प्रमाणीकरण के अयोग्य घोषित कर दिया जाता है)।

माइंड मैप · Mind Map

[Lecture 12: स्व-परागित, पर-परागित एवं वानस्पतिक खरीफ फसलों में बीज उत्पादन तकनीक]
├── 1. बीज की 4 पीढ़ियाँ एवं टैग के रंग (Seed Generation System & Tags)
│ ├── Nucleus Seed (कोई टैग नहीं, 100% शुद्ध, Ear-to-row maintenance) → Breeder Seed (सुनहरा पीला टैग, 12×6 cm, 100% शुद्ध)
│ ├── Foundation Seed (सफेद टैग, 15×7.5 cm, ≥99% शुद्ध) → Certified Seed (नीला टैग, 15×7.5 cm, ≥98% शुद्ध)
│ └── Registered Seed (बैंगनी टैग) | Truthfully Labelled (TL) Seed (ओपल हरा टैग, 15×10 cm)
├── 2. स्व-परागित एवं बहुधा पर-परागित फसलें (Self & Often Cross-Pollinated)
│ ├── स्व-परागित (धान, सोयाबीन, मूँगफली, मूँग, उड़द, मोठ, ग्वार, रागी): पृथक्करण दूरी FS = 3 m, CS = 3 m (यांत्रिक मिश्रण मुख्य खतरा)
│ └── बहुधा पर-परागित (किस्में): अरहर (200/100 m), कपास (50/30 m), तिल (100/50 m), बैंगन (200/100 m), भिंडी (400/200 m)
├── 3. पर-परागित फसलें (Cross-Pollinated OPVs / Composites)
│ ├── मक्का व बाजरा कम्पोजिट: FS = 400 m, CS = 200 m | अरंडी किस्में: 300/150 m
│ └── कद्दू वर्गीय सब्जियाँ (खीरा, लौकी, तरबूज, खरबूजा): FS = 800–1000 m, CS = 400–500 m (जंगली कड़वे कद्दू से बचाव अनिवार्य)
└── 4. वानस्पतिक रूप से प्रवर्धित फसलें (Vegetatively / Clonally Propagated)
├── मुख्य समस्या: 'Clonal Degeneration' (विषाणु, फाइटोप्लाज्मा व जीवाणुओं का पीढ़ी-दर-पीढ़ी संचयन)
├── गन्ना (3-Tier Seed Nursery): MHAT (54°C, 4 hrs), 8–10 माह पर कटाई, Red rot व GSD सहनशीलता = 0.0% (Zero tolerance)
└── अदरक/हल्दी (Ridomil MZ प्रकंद उपचार, सिंगल-बड प्रोट्रे तकनीक) | वायरस उन्मूलन: Apical Meristem Culture (0.2–0.5 mm)

प्रवाह चित्र · Flowchart

[स्व-परागित फसलों (धान/सोयाबीन/मूँग) में 'केंद्रक बीज (Nucleus Seed)' से 'प्रमाणित बीज' तक गुणन प्रवाह]
मूल किस्म की जनसंख्या से 500 सच्चे प्रारूपी एकल पौधों (500 True-to-type Single Plants) का चयन एवं अलग-अलग गहाई
↓
【वर्ष 1: बाली-से-पंक्ति / संतति कतार परीक्षण (Ear-to-Row / 500 Progeny Rows — प्रजनक की देखरेख में)】
प्रत्येक पौधे के बीज को 3 मीटर की अलग कतार में बोना → फूल व पकने पर कड़ा निरीक्षण
├── यदि किसी कतार में 1 भी भिन्न पौधा (Off-type) या बीज-जनित रोग दिखे ───► पूरी कतार को जड़ से नष्ट (Reject entire row!)
└── शेष 100% एकसमान व शुद्ध कतारों को काटकर मिलाना ───► 【केंद्रक बीज (Nucleus Seed — 100% शुद्ध)】
↓
【वर्ष 2: प्रजनक बीज (Breeder Seed — सुनहरा पीला टैग)】 (DAC इंडेंट के अनुसार कृषि विश्वविद्यालयों/ICAR में गुणन)
↓
【वर्ष 3: आधार बीज (Foundation Seed — सफेद टैग)】 (NSC / राज्य बीज निगम द्वारा प्रमाणीकरण एजेंसी की देखरेख में)
↓
【वर्ष 4: प्रमाणित बीज (Certified Seed — नीला टैग)】 (पंजीकृत बीज उत्पादक किसानों के खेतों में उत्पादन → किसानों को वितरण)

परीक्षा टिप्स · Exam Tips

  • बीज टैग के रंग और आकार हर परीक्षा में पूछे जाते हैं: Breeder seed = सुनहरा पीला (Golden Yellow, 12×6 cm); Foundation seed = सफेद (White, 15×7.5 cm); Certified seed = नीला (Azure Blue, 15×7.5 cm); Truthfully Labelled (TL) = ओपल हरा (Opal Green, 15×10 cm)।
  • न्यूनतम अंकुरण प्रतिशत (Minimum Germination %) का क्रम याद रखें: मक्का = 90% (सर्वाधिक) → धान, ज्वार, तिल = 80% → बाजरा व सभी दलहनें (मूँग, उड़द, अरहर, लोबिया) = 75% → मूँगफली व सोयाबीन = 70% → कपास व भिंडी = 65% (सबसे कम)।
  • स्व-परागित फसलों (धान, गेहूँ, सोयाबीन, मूँगफली, मूँग, उड़द) में किस्मों के बीज उत्पादन हेतु पृथक्करण दूरी आधार व प्रमाणित दोनों बीजों के लिए मात्र '3 मीटर' होती है।

त्वरित पुनरावृत्ति · Quick Revision

  • भारतीय बीज अधिनियम (Indian Seed Act): 1966 में पारित और 2 अक्टूबर 1969 से लागू; राष्ट्रीय बीज निगम (NSC): 1963।
  • स्व-परागित फसलों में किस्म अवनति का सबसे मुख्य कारण 'यांत्रिक मिश्रण' (Mechanical admixture) है।
  • पर-परागित फसलों में किस्म अवनति का सबसे मुख्य कारण 'प्राकृतिक पर-परागण' (Outcrossing) है।
  • वानस्पतिक (Clonal) फसलों में किस्म अवनति का मुख्य कारण 'प्रणालीगत विषाणु/फाइटोप्लाज्मा रोगों का संचयन' है।
  • ग्रो-आउट टेस्ट (GOT): बीज लॉट की आनुवंशिक शुद्धता (Genetic purity) की जाँच हेतु किया जाता है।

MCQs — उत्तर एवं व्याख्या

1. भारत में प्रजनक बीज (Breeder Seed), आधार बीज (Foundation Seed) और प्रमाणित बीज (Certified Seed) पर लगने वाले टैग के रंग क्रमशः क्या होते हैं?

  • (A) सफेद, नीला एवं पीला
  • (B) सुनहरा पीला (Golden Yellow), सफेद (White) एवं अज़ूर नीला (Azure Blue)
  • (C) हरा, बैंगनी एवं सफेद
  • (D) लाल, सफेद एवं नीला
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — प्रजनक बीज पर सुनहरा पीला (12×6 cm), आधार बीज पर सफेद (15×7.5 cm) और प्रमाणित बीज पर नीला टैग (15×7.5 cm) लगता है।

2. भारतीय न्यूनतम बीज प्रमाणीकरण मानकों के अनुसार धान, सोयाबीन, मूँगफली, मूँग और उड़द (स्व-परागित किस्मों) के लिए आधार एवं प्रमाणित बीज की पृथक्करण दूरी (Isolation Distance) कितनी होती है?

  • (A) 3 मीटर (FS) एवं 3 मीटर (CS)
  • (B) 50 मीटर एवं 30 मीटर
  • (C) 200 मीटर एवं 100 मीटर
  • (D) 400 मीटर एवं 200 मीटर
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — स्व-परागित फसलों में प्राकृतिक पर-परागण नगण्य होने से केवल यांत्रिक मिश्रण रोकने हेतु 3 मीटर की दूरी रखी जाती है।

3. निम्नलिखित खरीफ फसलों में से किस फसल के बीज प्रमाणीकरण हेतु न्यूनतम अंकुरण प्रतिशत मानक सर्वाधिक (90%) और किसका सबसे कम (65%) निर्धारित है?

  • (A) सर्वाधिक: धान (90%) एवं सबसे कम: सोयाबीन (65%)
  • (B) सर्वाधिक: मक्का (Maize – 90%) एवं सबसे कम: कपास और भिंडी (Cotton & Okra – 65%)
  • (C) सर्वाधिक: बाजरा (90%) एवं सबसे कम: मूँग (65%)
  • (D) सभी का एकसमान 80% है
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — मक्का में न्यूनतम अंकुरण मानक 90% है, जबकि कपास व भिंडी में कठोर बीजचोल के कारण मात्र 65% (और कद्दू में 60%) है।

4. किसी बीज लॉट की वास्तविक 'आनुवंशिक शुद्धता' (Genetic Purity) का सत्यापन करने के लिए कौन सा परीक्षण किया जाता है?

  • (A) टेट्राजोलियम परीक्षण (TZ test)
  • (B) ग्रो-आउट टेस्ट (Grow-Out Test – GOT)
  • (C) ओवन नमी परीक्षण
  • (D) ब्लॉटर पेपर परीक्षण
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — टेट्राजोलियम परीक्षण बीज की जीवन क्षमता (Viability) बताता है, जबकि आनुवंशिक शुद्धता जाँचने के लिए खेत में 400 पौधे उगाकर 'Grow-Out Test (GOT)' किया जाता है।

5. कदम (Kadam, 1942) के अनुसार स्व-परागित फसलों (जैसे धान व सोयाबीन) की किस्मों में आनुवंशिक अवनति (Varietal deterioration) का सबसे प्रमुख कारण क्या है?

  • (A) प्राकृतिक पर-परागण
  • (B) बुवाई, कटाई, थ्रेशिंग व भंडारण के दौरान यांत्रिक मिश्रण (Mechanical Admixture)
  • (C) अर्धसूत्री अनियमितता
  • (D) अंतःप्रजनन अवसाद
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — स्व-परागित फसलों में पर-परागण न होने से यांत्रिक मिश्रण (Mechanical admixture) ही शुद्धता नष्ट होने का सबसे बड़ा कारण है।

6. गन्ने की तीन-स्तरीय बीज नर्सरी (Three-tier seed nursery) में प्रजनक बीज को ग्रासी शूट (GSD) और रतून स्टंटिंग (RSD) से मुक्त करने के लिए कौन सा ताप उपचार अनिवार्य है?

  • (A) नम उष्ण वायु उपचार (Moist Hot Air Therapy – MHAT at 54°C, 95–99% RH for 4 hours)
  • (B) सौर ताप उपचार
  • (C) ठंडे पानी में भिगोना
  • (D) धुआँ देना
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — IISR लखनऊ द्वारा विकसित MHAT (54°C पर 4 घंटे) गन्ने के बीज टुकड़ों से प्रणालीगत रोगों को समाप्त करता है।

7. भिंडी (Okra) की खुली परागित किस्मों के आधार (FS) और प्रमाणित (CS) बीज उत्पादन हेतु न्यूनतम पृथक्करण दूरी कितनी रखी जाती है?

  • (A) 3 m एवं 3 m
  • (B) 50 m एवं 30 m
  • (C) 400 मीटर (FS) एवं 200 मीटर (CS)
  • (D) 1000 m एवं 500 m
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (C) — भिंडी में कीटों द्वारा उच्च पर-परागण और YVMV जोखिम के कारण FS में 400 मीटर व CS में 200 मीटर दूरी अनिवार्य है।

8. वानस्पतिक रूप से प्रवर्धित फसलों में विषाणु-संक्रमित (Virus-infected) मातृ पौधों से 100% वायरस-मुक्त पौधे तैयार करने की सर्वोत्तम जैव-प्रौद्योगिकी विधि कौन सी है?

  • (A) परागकोष संवर्धन
  • (B) शीर्ष विभज्योतक संवर्धन (Shoot Apical Meristem Tip Culture – 0.2 to 0.5 mm)
  • (C) भ्रूण बचाव
  • (D) केवल कवकनाशी छिड़काव
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — शीर्ष विभज्योतक (Apical meristem) में संवहनी ऊतक नहीं होते और विषाणु वहाँ तक नहीं पहुँच पाते, अतः मेरिस्टेम कल्चर से वायरस-मुक्त पौधे मिलते हैं।

9. सत्यता लेबल बीज (Truthfully Labelled – TL Seed) के थैले पर किस रंग का टैग लगाया जाता है?

  • (A) ओपल हरा (Opal Green Tag)
  • (B) बैंगनी (Purple)
  • (C) सफेद (White)
  • (D) नीला (Blue)
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — Truthfully Labelled (TL) बीज पर ओपल हरे रंग (Opal Green, 15×10 cm) का लेबल लगता है।

10. गन्ने की बीज फसल को चीनी मिल वाली सामान्य फसल (12 माह) की तुलना में कम आयु (8 से 10 माह) में ही क्यों काटा जाता है?

  • (A) क्योंकि 8–10 माह के अपरिपक्व गन्ने की कलियों में ग्लूकोज (Reducing sugar) व नमी अधिक होने से अंकुरण बहुत तेज और उच्च होता है
  • (B) क्योंकि उस समय चीनी सबसे अधिक होती है
  • (C) क्योंकि बाद में गन्ना सूख जाता है
  • (D) केवल समय बचाने के लिए
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — 12 माह के परिपक्व गन्ने में सुक्रोज होता है जो धीरे टूटता है, जबकि 8–10 माह के गन्ने में सीधे ग्लूकोज व उच्च नमी होने से कलियाँ तुरंत अंकुरित होती हैं।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. भारतीय बीज अधिनियम (Seed Act) किस वर्ष पारित हुआ और कब से पूरे देश में लागू हुआ?

सन् 1966 में पारित हुआ और 2 अक्टूबर 1969 से पूरे देश में लागू हुआ।

2. कपास और सोयाबीन के प्रमाणित बीज के लिए न्यूनतम अंकुरण प्रतिशत मानक कितना है?

कपास (Cotton): 65% और सोयाबीन (Soybean): 70%।

3. किस श्रेणी के बीज का उत्पादन बीज प्रमाणीकरण एजेंसी (Seed Certification Agency) के नियंत्रण में नहीं आता?

केंद्रक बीज (Nucleus Seed) एवं प्रजनक बीज (Breeder Seed — जिसकी निगरानी ICAR/SAU की मॉनिटरिंग टीम करती है)।

4. धान के बीज उत्पादन में मुख्य 'आपत्तिजनक खरपतवार' (Objectionable Weed) कौन सा है?

जंगली धान / लाल धान (Wild rice / Red rice — Oryza sativa var. fatua / spontanea)।

5. पर-परागित मक्का में आधार और प्रमाणित बीज (Composites) के लिए पृथक्करण दूरी कितनी होती है?

आधार बीज (FS): 400 मीटर और प्रमाणित बीज (CS): 200 मीटर।

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. भारत में प्रचलित बीज की चारों श्रेणियों (Nucleus, Breeder, Foundation, Certified) का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

1. केंद्रक बीज (Nucleus Seed): मूल प्रजनक द्वारा बाली-से-पंक्ति विधि से उत्पादित 100% शुद्ध मूल बीज (कोई टैग नहीं)। 2. प्रजनक बीज (Breeder Seed): केंद्रक बीज की संतति, सुनहरा पीला टैग, 100% आनुवंशिक शुद्धता। 3. आधार बीज (Foundation Seed): प्रजनक बीज की संतति, सफेद टैग, ≥99% शुद्धता (बीज प्रमाणीकरण की प्रथम श्रेणी)। 4. प्रमाणित बीज (Certified Seed): आधार बीज की संतति जो किसानों को बोने के लिए दी जाती है, नीला टैग, ≥98% शुद्धता।

2. स्व-परागित और पर-परागित खरीफ फसलों के बीज उत्पादन सिद्धांतों में मुख्य अंतर लिखिए।

स्व-परागित फसलों (धान, सोयाबीन, मूँगफली, मूँग) में प्राकृतिक पर-परागण <1% होने से पृथक्करण दूरी मात्र 3 मीटर रखी जाती है और केंद्रक बीज 'Ear-to-Row' एकल पादप संतति से बनाया जाता है। इसके विपरीत पर-परागित फसलों (मक्का, बाजरा, कद्दू कुल) में हवा व कीटों से भारी पर-परागण होने के कारण 200 से 1000 मीटर पृथक्करण दूरी रखी जाती है और अंतःप्रजनन अवसाद से बचने हेतु बड़ी समष्टि (Mass/Half-sib selection) से बीज बनाए रखा जाता है।

3. वानस्पतिक रूप से प्रवर्धित फसलों (गन्ना, अदरक, परवल) में 'Clonal Degeneration' क्या है और इसे कैसे रोका जाता है?

वानस्पतिक फसलों में लगातार कई वर्षों तक एक ही कंद/प्रकंद या टुकड़ों से फसल उगाने पर उनमें प्रणालीगत विषाणु, फाइटोप्लाज्मा (जैसे गन्ने का GSD), जीवाणु (RSD) और कवक रोग संचित हो जाते हैं जिससे किस्म की उपज गिर जाती है, इसे 'Clonal Degeneration' कहते हैं। इसे गन्ने में MHAT (54°C, 4 घंटे), अदरक में प्रकंद उपचार और टिश्यू कल्चर (Apical Meristem Culture) से रोका जाता है।

4. बीज उत्पादन में 'रोगिंग' (Roguing) क्या है और यह किन अवस्थाओं पर की जाती है?

बीज भूखंड की आनुवंशिक व भौतिक शुद्धता बनाए रखने के लिए खेत से भिन्न किस्म के पौधों (Off-types), स्वयं उगे पौधों (Volunteer plants), आपत्तिजनक खरपतवारों और बीज-जनित रोगग्रस्त पौधों को उखाड़कर बाहर करने की क्रिया 'रोगिंग' कहलाती है। यह मुख्यतः 3 अवस्थाओं पर की जाती है: 1. फूल आने से पूर्व (वानस्पतिक अवस्था), 2. फूल आने पर (सबसे महत्वपूर्ण, ताकि संदूषित पराग न उड़े), और 3. फसल पकने पर।

5. ग्रो-आउट टेस्ट (Grow-Out Test – GOT) कब और कैसे किया जाता है?

संकर बीजों (विशेषकर कपास, अरंडी, बाजरा व बैंगन संकरों) के प्रमाणित बीज लॉट को बेचने की अनुमति देने से पूर्व और आधार बीज लॉट की आनुवंशिक शुद्धता जाँचने हेतु GOT अनिवार्य है। इसमें बीज नमूने से कम से कम 400 पौधों को मानक नियंत्रण (Check sample) के साथ खेत में उगाया जाता है और वानस्पतिक व पुष्पीय चिह्नकों के आधार पर स्व-परागित मादा पौधों (Selfed female sibs) व ऑफ-टाइप्स की गणना की जाती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. भारत में बीज गुणन की पीढ़ी प्रणाली (Generation System of Seed Multiplication) का वर्णन करते हुए स्व-परागित और बहुधा पर-परागित खरीफ फसलों में केंद्रक, प्रजनक, आधार और प्रमाणित बीज उत्पादन की वैज्ञानिक विधि लिखिए।

चारों बीज श्रेणियों का प्रवाह, टैग के रंग व आकार, कदम (1942) के अवनति के कारण, हैरिंगटन की Ear-to-row केंद्रक बीज रखरखाव विधि तथा धान, मूँगफली, सोयाबीन, मूँग, अरहर, कपास व भिंडी के पृथक्करण दूरी, रोगिंग और प्रयोगशाला मानकों (अंकुरण व शुद्धता %) का सविस्तर विवरण दें।

2. पर-परागित खरीफ फसलों (मक्का, बाजरा, अरंडी एवं कद्दू वर्गीय सब्जियों) की खुली परागित/कम्पोजिट किस्मों के बीज उत्पादन के आनुवंशिक एवं सस्य सिद्धांतों का विस्तृत वर्णन कीजिए।

हाार्डी-वेनबर्ग संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता, अंतःप्रजनन अवसाद से बचाव, मक्का व बाजरा में ग्रिड मास सिलेक्शन व हाफ-सिब चयन, दूरी व समय पृथक्करण (Time isolation), सीमांत कतारें (Border rows) और कद्दू वर्गीय सब्जियों में जंगली कड़वे कद्दू से 800–1000 मीटर पृथक्करण व बीज निष्कर्षण (किण्वन व अम्ल विधि) का वर्णन करें।

3. वानस्पतिक रूप से प्रवर्धित खरीफ फसलों (गन्ना, अदरक, हल्दी एवं परवल) में रोग-मुक्त बीज उत्पादन तकनीक और सूक्ष्म-प्रवर्धन (Micropropagation) की भूमिका की विवेचना कीजिए।

गन्ने की तीन-स्तरीय बीज नर्सरी प्रणाली, MHAT (54°C, 4 घंटे), 8–10 माह की शॉर्ट-क्रॉप कटाई, लाल सड़न व GSD के लिए शून्य सहनशीलता, बड-चिप तकनीक, अदरक में प्रकंद उपचार व प्रोट्रे तकनीक तथा विभज्योतक संवर्धन (Apical meristem culture) और वायरस इंडेक्सिंग (ELISA/PCR) का सविस्तर वर्णन करें।

परीक्षा वन-लाइनर्स

  • प्रजनक बीज (Breeder Seed) के सुनहरे पीले टैग का मानक आकार 12 × 6 सेमी होता है, जबकि आधार और प्रमाणित बीज के टैग का आकार 15 × 7.5 सेमी होता है।
  • भारत में राष्ट्रीय बीज निगम (National Seeds Corporation – NSC) की स्थापना मार्च 1963 में की गई थी।
  • प्रमाणित संकर कपास बीज (Certified Hybrid Cotton Seed) के लिए Grow-Out Test (GOT) में न्यूनतम आनुवंशिक शुद्धता 90.0% होना अनिवार्य है।
  • मूँगफली और सोयाबीन के बीजों में तेल व प्रोटीन के ऑक्सीकरण और भ्रूण की सतही स्थिति के कारण भंडारण क्षमता सबसे कम होती है।
  • मक्का में 'समय पृथक्करण' (Time Isolation) केवल प्रमाणित बीज उत्पादन में अनुमत है, आधार बीज उत्पादन में कदापि नहीं।

आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध GPB 311 Smart Notes।

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