GPB 311 Lecture 05: अरहर (Pigeonpea) और सोयाबीन (Soybean) में फसल सुधार: उत्पत्ति, पुष्प जीवविज्ञान, संकर एवं प्रजनन

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GPB 311 · Kharif Crop Improvement Smart Notes
LECTURE 05 / 15 · GPB 311

अरहर (Pigeonpea) और सोयाबीन (Soybean) में फसल सुधार: उत्पत्ति, पुष्प जीवविज्ञान, संकर एवं प्रजनन

Crop Improvement in Pigeonpea (Arhar/Tur) and Soybean

Pigeonpea / Red gram (अरहर / तूर – Cajanus cajan), Soybean (सोयाबीन – Glycine max)

विषय सूची · Quick Navigationअधिगम उद्देश्य · Learning Objectivesप्रस्तावना · Introductionमहत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitionsवर्गीकरण · Classificationमहत्वपूर्ण सिद्धांत · Principlesफसल सुधार के विस्तृत विषय · Detailed Topicsतुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tablesसूत्र एवं गणनाएँ · Calculationsमाइंड मैप · Mind Mapप्रवाह चित्र · Flowchartपरीक्षा टिप्स · Exam Tipsत्वरित पुनरावृत्ति · Quick RevisionMCQs — उत्तर एवं व्याख्याअति लघु उत्तरीय प्रश्नलघु उत्तरीय प्रश्नदीर्घ उत्तरीय प्रश्नपरीक्षा वन-लाइनर्स
Original syllabus: Crop improvement aspects in Pigeonpea and Soybean as mentioned in the syllabus such as centers of origin, distribution of species, wild relatives, floral biology, breeding objectives and procedures etc.
अध्ययन सामग्री: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध GPB 311 notes पर आधारित। किस्मों एवं तकनीकों के उदाहरणों को उनके स्रोत और क्षेत्रीय संदर्भ में पढ़ें।

अधिगम उद्देश्य · Learning Objectives

  • अरहर (Cajanus cajan, 2n=22) की भारतीय उत्पत्ति, जंगली पूर्वज (Cajanus cajanifolius), दोनों वानस्पतिक समूहों (var. bicolor एवं var. flavus) और बहुधा पर-परागित (20% पर-परागण) पुष्प जीवविज्ञान को समझना।
  • विश्व में किसी भी दलहनी फसल में प्रथम व्यावसायिक संकर—अरहर का GMS संकर 'ICPH-8' (1991) और प्रथम CGMS संकर 'GTH-1 / ICPH-2671' (डॉ. के.बी. सक्सेना)—की कार्यप्रणाली सीखना।
  • सोयाबीन (Glycine max, 2n=40 – 'Wonder Crop / Golden Bean') की चीनी उत्पत्ति, जंगली पूर्वज (Glycine soja), पोषण-रोधी कारकों (Kunitz Trypsin Inhibitor व Lipoxygenase) के उन्मूलन और प्रजनन विधियों का अध्ययन करना।

प्रस्तावना · Introduction

अरहर (Pigeonpea / Red Gram – Cajanus cajan) खरीफ की सबसे प्रमुख दलहन है और यह विश्व की एकमात्र ऐसी दलहनी फसल (Only pulse crop in the world) है जिसमें व्यावसायिक संकर (Commercial Hybrids) सफलतापूर्वक विकसित और विमोचित किए गए हैं! दूसरी ओर, सोयाबीन (Soybean – Glycine max) एक अद्भुत द्वि-उद्देश्यीय 'चमत्कारी फसल' (Wonder Crop) है जिसमें 40–42% उच्च गुणवत्ता का प्रोटीन और 18–20% खाद्य तेल दोनों पाए जाते हैं, और आज यह भारत की नं. 1 तिलहनी फसल है।

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ · Definitions

विश्व का प्रथम दलहन संकर (World's First Pulse Hybrid – ICPH-8)

सन् 1991 में ICRISAT, हैदराबाद द्वारा आनुवंशिक नर बंध्यता (GMS – 'ms1' अप्रभावी जीन: MS Prabhat DT × ICPL 161) के उपयोग से विकसित विश्व की किसी भी दलहनी फसल का पहला संकर।

अरहर में CGMS प्रणाली (CMS in Pigeonpea)

जंगली प्रजाति Cajanus cajanifolius (A4 cytoplasm) एवं C. scarabaeoides (A2 cytoplasm) से विकसित कोशिकाद्रव्यी-आनुवंशिक नर बंध्यता, जिससे 'GTH-1' (2004) और 'ICPH-2671' (2010, डॉ. के.बी. सक्सेना) जैसे व्यावसायिक संकर बने।

कुनिट्ज़ ट्रिप्सिन संदमक (Kunitz Trypsin Inhibitor – KTI)

कच्चे सोयाबीन के बीज में पाया जाने वाला प्रमुख पोषण-रोधी प्रोटीन (Anti-nutritional factor, 'Ti' जीन द्वारा नियंत्रित), जो मानव व पशुओं की आँत में प्रोटीन पचाने वाले ट्रिप्सिन एंजाइम को रोकता है।

लिपोक्सीजिनेज एंजाइम (Lipoxygenase – Lox1, Lox2, Lox3)

सोयाबीन के दानों में पाया जाने वाला वह एंजाइम जो असंतृप्त वसा अम्लों का ऑक्सीकरण कर सोया दूध और सोया आटे में अप्रिय 'कसैली/बीनी गंध' (Beany flavor / Off-flavor) उत्पन्न करता है।

वर्गीकरण · Classification

अरहर (Cajanus cajan, 2n = 2x = 22) के दो वानस्पतिक प्रकार (Shaw et al., 1933)

1. Cajanus cajan var. bicolor ('अरहर' प्रकार — उत्तर भारत में प्रमुख): बहुवर्षीय स्वभाव, लंबे व झाड़ीदार पौधे, देर से पकने वाले (180–260 दिन), पीले फूल जिन पर लाल-बैंगनी धारियाँ होती हैं, प्रत्येक फली में 4–5 गहरे रंग के दाने। 2. Cajanus cajan var. flavus ('तूर' प्रकार — दक्षिण व मध्य भारत में प्रमुख): एकवर्षीय, छोटे पौधे, जल्दी पकने वाले (120–150 दिन), पूरी तरह पीले फूल, फली में केवल 2–3 दाने।

अरहर के जीन पूल एवं जंगली संबंधी (Former Genus Atylosia, now merged into Cajanus)

1. Primary Gene Pool: कृष्य C. cajan। 2. Secondary Gene Pool (10 जंगली प्रजातियाँ जो C. cajan से संकरण करती हैं): Cajanus cajanifolius (प्रत्यक्ष जंगली पूर्वज एवं A4 CMS का दाता!), C. scarabaeoides (फली छेदक Helicoverpa प्रतिरोधी एवं A2 CMS का दाता), C. sericeus (बंध्यता मोजैक SMD प्रतिरोधी), C. albicans (उच्च प्रोटीन दाता), C. lineatus। 3. Tertiary Gene Pool: C. platycarpus (Phytophthora blight प्रतिरोधी व अगेतीपन), C. volubilis।

सोयाबीन (Genus Glycine, 2n = 2x = 40) की प्रजातियाँ

1. Subgenus Soja (एकवर्षीय, 2n=40): कृष्य सोयाबीन Glycine max एवं इसका प्रत्यक्ष जंगली पूर्वज Glycine soja (पूर्व नाम G. ussuriensis — चीन में पाया जाता है)। 2. Subgenus Glycine (बहुवर्षीय जंगली प्रजातियाँ, ऑस्ट्रेलिया में प्रमुख): G. tomentella, G. canescens, G. clandestina (सोयाबीन रस्ट प्रतिरोध के स्रोत)।

महत्वपूर्ण सिद्धांत · Principles

  • अरहर में GMS बनाम CGMS की क्रांति: 1991 में बने प्रथम संकर 'ICPH-8' में आनुवंशिक नर बंध्यता (GMS – ms1ms1) का प्रयोग हुआ था। GMS की सबसे बड़ी समस्या यह थी कि बीज उत्पादन भूखंड की मादा कतारों में 50% पौधे नर उर्वर (Msms) निकलते थे जिन्हें फूल आते ही पहचानकर हाथ से उखाड़ना (Roguing of 50% fertile plants) पड़ता था, जिससे बीज बहुत महँगा पड़ता था। बाद में जंगली प्रजाति Cajanus cajanifolius से 'A4 CMS' खोजकर 'ICPH-2671' (Pushkal) बनाया गया जिसमें मादा के 100% पौधे बंध्य रहते हैं!
  • भारत में सोयाबीन का 'पीला सोना' उभार (Yellow Revolution of Soybean in MP): 1960 के दशक में गोविंद बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय (पंतनगर) और जबलपुर (JNKVV) द्वारा अमेरिका से 'Bragg', 'Clark-63', 'Lee' और 'Hardee' जैसी पीले दाने वाली किस्मों का पुरःस्थापन (Introduction) किया गया, जिसने मध्य प्रदेश को भारत का 'सोया राज्य' बना दिया।

फसल सुधार के विस्तृत विषय · Detailed Topics

1. Crop Improvement in Pigeonpea / Red Gram (अरहर / तूर — Cajanus cajan L. Millsp., 2n = 2x = 22)
Pigeonpea (अरहर — गहरी मूसला जड़ वाली खरीफ की मुख्य दलहन, अंकुरण: Hypogeal/अधोभूमिक) · विशिष्ट जानकारी: उत्पत्ति केंद्र: भारत (पूर्वी घाट एवं ओडिशा-बस्तर क्षेत्र, जहाँ इसका सीधा जंगली पूर्वज Cajanus cajanifolius पाया जाता है)।

महत्व: अरहर विश्व की पहली दलहन फसल है जिसका संपूर्ण जीनोम अनुक्रमण (First legume genome sequenced under Indian leadership – IIPR & ICRISAT, 2011; ~833 Mb) किया गया।

महत्वपूर्ण बिंदु · Key Concepts
  • पुष्प जीवविज्ञान एवं बहुधा पर-परागण (Often Cross-Pollination): कक्षीय असीमाक्षी पुष्पक्रम (Axillary raceme) में पीले या लाल-धारीदार तितलीनुमा फूल लगते हैं और (9)+1 द्विसंघी पुंकेसर होते हैं। यद्यपि कली खुलने से पहले परागकोष फट जाते हैं, फिर भी कली के अधखुले रहने और बड़ी मक्खियों/मधुमक्खियों (Megachile spp. एवं Apis dorsata) के भ्रमण के कारण अरहर में औसतन 20% (5% से 40% तक!) प्राकृतिक पर-परागण होता है।
  • प्रजनन उद्देश्य: (1) अल्पावधि (Short-duration: 120–140 दिन — ताकि अरहर के बाद रबी में गेहूँ बोया जा सके, जैसे UPAS-120 व Pusa-992), (2) उकठा रोग (Fusarium udum), बंध्यता मोजैक (Sterility Mosaic Disease – SMD, वाहक: Aceria cajani माइट) एवं फाइटोफ्थोरा ब्लाइट के प्रति प्रतिरोध, (3) फली छेदक (Helicoverpa armigera) व फली मक्खी प्रतिरोध, (4) उच्च प्रोटीन एवं संकर ओज।
सुधार रणनीति · Breeding Approach
  • भविष्य की क्रांति: 85–90 दिन में पकने वाली सुपर-अगेती एवं प्रकाश-असंवेदनशील अरहर किस्में (जैसे ICPL 88039, पूसा अरहर-16 / PADT-16)।
आनुवंशिक एवं जैविक विशेषताएँ

प्रमुख प्रजनन विधियाँ एवं किस्में: 1. शुद्ध वंशक्रम एवं वंशावली किस्में: UPAS-120 (उपास-120: 120–125 दिन में पकने वाली किस्म जिसने उत्तर भारत में 'अरहर-गेहूँ' फसल चक्र संभव बनाया!), प्रभात (Prabhat – अति अगेती, 110 दिन), T-21 (प्रथम संकर व्युत्पन्न किस्म: T-1 × T-190), बहार (Bahar – रबी अरहर हेतु उपयुक्त, SMD प्रतिरोधी), मारुति (ICP 8863 – उकठा प्रतिरोधी मानक किस्म!), आशा (ICPL 87119 – उकठा व SMD दोनों के प्रति प्रतिरोधी!), मालवीय विकास (MA-6), नरेंद्र अरहर-1, पूसा-992।

जैविकी एवं उत्पादन संदर्भ

2. उत्परिवर्तन किस्में: विशाखा-1 (T Vishakha-1), TAT-10, CO-3। 3. अंतर्विशिष्ट उच्च-प्रोटीन किस्में (C. cajan × C. albicans / C. scarabaeoides): GT-100, ICPL 87091।

पुष्पन, परागण एवं उपयोग संदर्भ

4. संकर अरहर (Hybrid Pigeonpea): (a) GMS आधारित संकर (ms1 व ms2 जीन): ICPH-8 (1991, ICRISAT), PPH-4 (PAU), CoH-1, CoH-2, AKPH-4101। (b) CGMS आधारित संकर (A4 cytoplasm from C. cajanifolius एवं A2 from C. scarabaeoides): GTH-1 (गुजरात तूर हाइब्रिड-1, 2004 — विश्व का प्रथम CMS दलहन संकर, SKNAU दांतीवाड़ा), ICPH-2671 ('पुष्कल', 2010 — 35–40% अधिक उपज), ICPH-2740 ('मान्या')।

Exam Key: 2n = 22 + उत्पत्ति: भारत + पूर्वज: Cajanus cajanifolius + ~20% पर-परागण (Megachile bees) + प्रथम GMS संकर: ICPH-8 (1991) + प्रथम CMS संकर: GTH-1 (2004) व ICPH-2671 (A4 cytoplasm) + अगेती किस्म: UPAS-120 + उकठा व SMD प्रतिरोधी: Asha (ICPL 87119) व Maruti (ICP 8863)।
2. Crop Improvement in Soybean (सोयाबीन — Glycine max L. Merrill, 2n = 2x = 40)
Soybean (सोयाबीन — 'Wonder Crop / Golden Bean / Meat of the Fields'; 40–42% प्रोटीन + 20% तेल; अंकुरण: Epigeal) · विशिष्ट जानकारी: उत्पत्ति केंद्र: उत्तर-पूर्वी चीन (Manchuria region – Vavilov) | प्रत्यक्ष जंगली पूर्वज: Glycine soja (2n=40)।

महत्व: सोयाबीन का जीनोम अनुक्रमित होने वाला पहला फलीदार पादप (First legume sequenced globally in 2010 – Williams 82 किस्म) है। भारत में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र इसके प्रमुख उत्पादक हैं।

महत्वपूर्ण बिंदु · Key Concepts
  • पुष्प जीवविज्ञान एवं कठोर स्व-परागण: पत्तियों के कक्ष में छोटे सफेद या बैंगनी रंग के गुच्छेदार फूल (Axillary racemes) लगते हैं। कली खुलने से 1 दिन पहले ही परागकोष फटकर वर्तिकाग्र पर पराग गिरा देते हैं (Strict Cleistogamy), जिससे इसमें >99.5% स्व-परागण होता है। तने की वृद्धि के आधार पर किस्में दो प्रकार की होती हैं—अनिश्चित वृद्धि वाली (Indeterminate) और निश्चित वृद्धि वाली (Determinate – भारत में प्रमुख)।
  • सोयाबीन प्रजनन की 4 विशेष चुनौतियाँ (प्रजनन उद्देश्य): (1) बीज की जीवन क्षमता का शीघ्र ह्रास (Poor seed longevity / viability in storage — पतले बीजचोल के कारण गहाई में चोट लगने से अंकुरण जल्दी गिर जाता है), (2) पकने पर फलियों का चटकना (Pod shattering resistance), (3) पीत मोजैक (YMV – उत्तर भारत में) और सोयाबीन किट्ट (Phakopsora pachyrhizi – दक्षिण व मध्य भारत में) प्रतिरोध, (4) पोषण-रोधी तत्वों (Kunitz Trypsin Inhibitor – KTI एवं Lipoxygenase – Lox) से मुक्त खाद्य सोयाबीन का विकास।
सुधार रणनीति · Breeding Approach
  • भंडारण में बीज अंकुरण क्षमता (Seed longevity) सुधारने हेतु छोटे बीज आकार (100-seed weight < 10–12 g, जैसे 'कालीतुर' या 'भट्ट' देसी सोयाबीन के जीन) को बड़े पीले सोयाबीन में स्थानांतरित किया गया है।
आनुवंशिक एवं जैविक विशेषताएँ

प्रजनन विधियाँ एवं किस्में: 1. पादप पुरःस्थापन (Direct Introduction from USA): Bragg (ब्रेग), Lee (ली), Clark-63, Hardee, Monetta। 2. शुद्ध वंशक्रम वरण: पंजाब-1 (Punjab-1), कलितुर (काली देसी सोयाबीन)। 3. वंशावली विधि (Pedigree Method — भारत में 90% किस्में इसी से बनी हैं): JS 335 (जवाहर सोयाबीन 335 — J.S. 75-46 × Bragg से विकसित, 25 वर्षों तक भारत के 60% क्षेत्र पर राज करने वाली मेगा किस्म!), JS 93-05, JS 95-60 (मात्र 82–85 दिन में पकने वाली अगेती किस्म), JS 20-34, JS 20-98, अहिल्या-1 से 4 (NRC-2, NRC-7, NRC-37), PK-472, शिलाजीत, अलंकार, MAUS-71।

जैविकी एवं उत्पादन संदर्भ

भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (IISR, इंदौर) एवं IARI द्वारा मार्कर-सहायता प्राप्त प्रजनन (MABB) से विकसित विशेष गुणवत्ता वाली किस्में:
• 'NRC 127' (KTI-free सोयाबीन — जिसमें Kunitz Trypsin Inhibitor नहीं होता, अतः इसे बिना उबाले सीधे पशु आहार व खाद्य प्रसंस्करण में उपयोग कर सकते हैं!)
• 'NRC 132' एवं 'NRC 142' (KTI + Lipoxygenase-2 दोनों से मुक्त बीनी-गंध रहित सोयाबीन!)
• 'MACS 1407' (अगरकर अनुसंधान संस्थान, पुणे द्वारा विकसित उच्च उपज व कीट प्रतिरोधी किस्म)।

पुष्पन, परागण एवं उपयोग संदर्भ

सोयाबीन एक कठोर लघु-दिवस पौधा (Quantitative short-day plant) है और इसे विश्व स्तर पर अक्षांशों के अनुसार 13 परिपक्वता समूहों (Maturity Groups: MG 000 से MG X) में बाँटा गया है।

Exam Key: 2n = 40 + उत्पत्ति: चीन + पूर्वज: Glycine soja + 40% प्रोटीन + 20% तेल + USA Introductions: Bragg, Lee, Clark-63 + भारत की मेगा किस्म: JS 335 + अगेती: JS 95-60 + KTI-free किस्म: NRC 127 + KTI & Lipoxygenase-2 free: NRC 142।

तुलनात्मक सारणियाँ · Comparison Tables

तालिका 5.1: अरहर (Pigeonpea) एवं सोयाबीन (Soybean) का तुलनात्मक प्रजनन विवरण

विशेषताअरहर (Pigeonpea – Cajanus cajan)सोयाबीन (Soybean – Glycine max)
गुणसूत्र संख्या एवं उत्पत्ति2n = 2x = 22 | उत्पत्ति: भारत (पूर्वी घाट)2n = 2x = 40 | उत्पत्ति: चीन (मंचूरिया)
प्रत्यक्ष जंगली पूर्वजCajanus cajanifolius (A4 CMS का दाता)Glycine soja (G. ussuriensis)
परागण एवं अंकुरणबहुधा पर-परागित (~20% पर-परागण); अधोभूमिक (Hypogeal)कठोर स्व-परागित (>99.5% Cleistogamous); भूम्युपरिक (Epigeal)
पोषण संघटन व विशेष गुण21–22% प्रोटीन; गहरी मूसला जड़ व सूखा सहिष्णु40–42% प्रोटीन + 18–20% तेल; KTI व Lipoxygenase उपस्थित
प्रमुख एवं ऐतिहासिक किस्मेंUPAS-120, Bahar, Asha, Maruti; संकर: ICPH-8, GTH-1, ICPH-2671Bragg, JS 335, JS 95-60, PK-472, NRC 127 (KTI-free), NRC 142

सूत्र एवं गणनाएँ · Calculations

1. अरहर के GMS संकर (जैसे ICPH-8) बनाम CGMS संकर (जैसे ICPH-2671) के बीज उत्पादन भूखंड की गणना

GMS मादा पंक्ति (Msms × msms) = 50% नर उर्वर (Msms – उखाड़ने योग्य) + 50% नर बंध्य (msms) | CGMS मादा पंक्ति (A-line × B-line) = 100% नर बंध्य

उदाहरण: यदि 1 हेक्टेयर अरहर संकर बीज उत्पादन खेत में मादा पंक्ति के 40,000 पौधे लगाए गए हैं:
• GMS प्रणाली (ICPH-8) में: फूल आने की पहली कली पर सभी 40,000 पौधों के परागकोष जाँचकर लगभग 20,000 उर्वर पौधों (50% fertile sibs) को मजदूरों द्वारा उखाड़ना (Roguing) पड़ेगा और केवल 20,000 पौधों से ही संकर बीज मिलेगा।
• CGMS प्रणाली (ICPH-2671 / GTH-1) में: सभी 40,000 मादा पौधे 100% नर बंध्य होते हैं, अतः कोई पौधा उखाड़ना नहीं पड़ता और दोगुना संकर बीज सस्ते में प्राप्त होता है!

माइंड मैप · Mind Map

[Lecture 05: अरहर (Pigeonpea) एवं सोयाबीन (Soybean) में फसल सुधार]
├── 1. अरहर / तूर (Cajanus cajan, 2n=22)
│ ├── उत्पत्ति: भारत | प्रत्यक्ष पूर्वज: Cajanus cajanifolius | अन्य जंगली: C. scarabaeoides, C. albicans
│ ├── 2 प्रकार: var. bicolor (उत्तर भारत, बहुवर्षीय/देर से पकने वाली) & var. flavus (दक्षिण भारत, अगेती तूर)
│ ├── पुष्प जीवविज्ञान: Often cross-pollinated (~20% पर-परागण, Megachile मधुमक्खियों द्वारा)
│ ├── प्रमुख किस्में: UPAS-120 (अरहर-गेहूँ चक्र), Prabhat, Bahar, Maruti (Wilt प्रतिरोधी), Asha (Wilt + SMD प्रतिरोधी)
│ └── विश्व के प्रथम दलहन संकर:
│ ├── GMS संकर (ms1 जीन): ICPH-8 (1991, ICRISAT), PPH-4, CoH-1
│ └── CGMS संकर (A4/A2 cytoplasm): GTH-1 (2004), ICPH-2671 (Pushkal, 2010), ICPH-2740
└── 2. सोयाबीन (Glycine max, 2n=40)
├── उत्पत्ति: चीन | पूर्वज: Glycine soja | 40–42% प्रोटीन + 20% तेल ('Wonder Crop')
├── कठोर स्व-परागित (Cleistogamous) | चुनौतियाँ: Poor seed longevity, Pod shattering, Rust & YMV
├── USA पुरःस्थापन: Bragg, Lee, Clark-63 | भारतीय मेगा किस्म: JS 335, अगेती: JS 95-60, PK-472
└── जैव-प्रौद्योगिकी / MABB किस्में: NRC 127 (Kunitz Trypsin Inhibitor - KTI free), NRC 142 (KTI + Lipoxygenase-2 free)

प्रवाह चित्र · Flowchart

[अरहर में जंगली प्रजाति 'Cajanus cajanifolius' से CGMS संकर (ICPH-2671) के विकास का प्रवाह]
जंगली पूर्वज: Cajanus cajanifolius (♀ — A4 Cytoplasm दाता) × कृष्य अरहर: Cajanus cajan (♂ — Nuclear genome दाता)
↓ (F1 संकर पर कृष्य अरहर का 6–7 पीढ़ियों तक लगातार प्रतीप संकरण - Backcrossing / Genome Substitution)
1. A-Line (CMS Female: S rfrf — 100% नर बंध्य, पारदर्शी खाली परागकोष)
2. B-Line (Maintainer: N rfrf — सम-आनुवंशिक नर उर्वर पंक्ति जो A-line को बनाए रखती है)
↓ (संकर बीज उत्पादन भूखंड — 4 मादा A : 1 नर R कतार अनुपात + मधुमक्खी परागण)
[A-Line (ICPA 2043)] × [R-Line (ICPR 2671 — Fertility Restorer: RfRf)]
↓
व्यावसायिक CGMS संकर 'ICPH-2671 (पुष्कल)' (35–40% उच्च उपज एवं उकठा व SMD प्रतिरोधी)

परीक्षा टिप्स · Exam Tips

  • परीक्षा में बहुत ध्यान से अंतर करें: विश्व का प्रथम अरहर संकर (GMS आधारित) = 'ICPH-8' (1991, ICRISAT); विश्व का प्रथम CMS/CGMS आधारित अरहर संकर = 'GTH-1' (2004, A2 cytoplasm) एवं 'ICPH-2671' (2010, A4 cytoplasm)।
  • अरहर की 'मारुति (ICP 8863)' उकठा (Wilt) प्रतिरोध के लिए और 'आशा (ICPL 87119)' उकठा + बंध्यता मोजैक (Wilt + SMD) दोनों के प्रतिरोध के लिए राष्ट्रीय चेक किस्में हैं।
  • सोयाबीन की 'NRC 127' भारत की पहली Kunitz Trypsin Inhibitor (KTI) मुक्त किस्म है और 'NRC 142' KTI + Lipoxygenase-2 दोनों से मुक्त किस्म है।

त्वरित पुनरावृत्ति · Quick Revision

  • अरहर (Cajanus cajan, 2n=22): उत्पत्ति—भारत; पूर्वज—C. cajanifolius; ~20% पर-परागण (Often cross-pollinated)।
  • UPAS-120 (120 दिन): उत्तर भारत में 'अरहर-गेहूँ' फसल चक्र को संभव बनाने वाली प्रसिद्ध अगेती किस्म।
  • ICPH-8 (1991): विश्व की किसी भी दलहनी फसल का पहला व्यावसायिक संकर (GMS आधारित)।
  • सोयाबीन (Glycine max, 2n=40): उत्पत्ति—चीन; पूर्वज—Glycine soja; 40% प्रोटीन व 20% तेल।
  • JS 335: भारत की सर्वाधिक लोकप्रिय सोयाबीन किस्म; NRC 127: KTI-मुक्त सोयाबीन किस्म।

MCQs — उत्तर एवं व्याख्या

1. सन् 1991 में ICRISAT, हैदराबाद द्वारा विकसित विश्व की किसी भी दलहनी फसल का प्रथम व्यावसायिक संकर कौन सा है?

  • (A) ICPH-8 (अरहर संकर — GMS आधारित)
  • (B) Pusa RH-10
  • (C) HHB-67
  • (D) CSH-1
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — MS Prabhat (DT) × ICPL 161 के संकरण से विकसित 'ICPH-8' (1991) विश्व का पहला व्यावसायिक दलहन संकर है।

2. अरहर (Cajanus cajan) का प्रत्यक्ष जंगली पूर्वज कौन सा है जिससे व्यावसायिक संकर प्रजनन हेतु 'A4 CMS' कोशिकाद्रव्य भी प्राप्त किया गया है?

  • (A) Cajanus cajanifolius (पूर्व नाम: Atylosia cajanifolia)
  • (B) Cajanus platycarpus
  • (C) Vigna sublobata
  • (D) Glycine soja
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — पूर्वी घाट (ओडिशा) में पाया जाने वाला Cajanus cajanifolius अरहर का सीधा जंगली पूर्वज और A4 CMS का स्रोत है।

3. सोयाबीन (Glycine max) में द्विगुणित गुणसूत्र संख्या (2n) और उसका उत्पत्ति केंद्र क्या है?

  • (A) 2n = 22, भारत
  • (B) 2n = 40, चीन (China)
  • (C) 2n = 20, मेक्सिको
  • (D) 2n = 14, अफ्रीका
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — सोयाबीन (Glycine max) में 2n = 40 गुणसूत्र होते हैं और इसकी उत्पत्ति चीन में जंगली पूर्वज Glycine soja से हुई है।

4. अरहर की किस अगेती किस्म (120–125 दिन) के विकास ने उत्तर भारत में सिंचित क्षेत्रों में 'अरहर-गेहूँ' (Pigeonpea-Wheat) द्विफसली चक्र को संभव बनाया?

  • (A) बहार (Bahar)
  • (B) उपास-120 (UPAS-120, पंतनगर द्वारा विकसित)
  • (C) मारुति
  • (D) टी-1
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — पंतनगर द्वारा विकसित UPAS-120 (U.P. Arhar Selection-120) नवंबर में पक जाती है जिससे समय पर गेहूँ की बुवाई हो जाती है।

5. कच्चे सोयाबीन में पाया जाने वाला प्रमुख पोषण-रोधी कारक कौन सा है जिसे हाल ही में 'NRC 127' किस्म में MABB द्वारा हटाया गया है?

  • (A) कुनिट्ज़ ट्रिप्सिन संदमक (Kunitz Trypsin Inhibitor – KTI)
  • (B) धुरिन (Dhurrin)
  • (C) गॉसिपॉल
  • (D) BOAA
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — IISR इंदौर और IARI ने मार्कर-सहायता प्राप्त प्रजनन से 'NRC 127' को Kunitz Trypsin Inhibitor (KTI) से मुक्त बनाया है।

6. सोयाबीन के दूध और आटे में आने वाली अप्रिय 'कसैली/बीनी गंध' (Beany off-flavor) किस एंजाइम के कारण होती है?

  • (A) इन्वर्टेज
  • (B) लिपोक्सीजिनेज (Lipoxygenase – Lox1, Lox2, Lox3)
  • (C) एमाइलेज
  • (D) यूरिएज
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — Lipoxygenase एंजाइम पॉलीअनसैचुरेटेड वसा अम्लों का ऑक्सीकरण कर बीनी गंध पैदा करता है; NRC 142 इससे मुक्त है।

7. अरहर की कौन सी प्रसिद्ध किस्म उकठा (Fusarium Wilt) और बंध्यता मोजैक (SMD) दोनों रोगों के प्रति संयुक्त प्रतिरोधी है?

  • (A) आशा (Asha – ICPL 87119)
  • (B) प्रभात
  • (C) उपास-120
  • (D) टी-21
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — ICRISAT द्वारा विकसित 'आशा (ICPL 87119)' उकठा और बंध्यता मोजैक दोनों के प्रति उच्च प्रतिरोधी है।

8. भारत में 1960 के दशक में अमेरिका (USA) से सीधे पुरःस्थापित (Directly Introduced) की गई सोयाबीन की प्रसिद्ध पीली किस्म कौन सी है?

  • (A) ब्रेग एवं क्लार्क-63 (Bragg & Clark-63)
  • (B) जेएस 335
  • (C) अहिल्या-4
  • (D) काशी कंचन
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — Bragg, Lee, Clark-63 और Hardee अमेरिका से सीधे भारत में लाई गई पुरःस्थापित सोयाबीन किस्में हैं।

9. अरहर में लगभग 20% प्राकृतिक पर-परागण (Often cross-pollination) मुख्यतः किसके द्वारा होता है?

  • (A) केवल हवा द्वारा
  • (B) पत्ती काटने वाली मधुमक्खियों एवं बड़ी मधुमक्खियों (Megachile spp. & Apis dorsata) द्वारा
  • (C) पानी द्वारा
  • (D) सफेद मक्खी द्वारा
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B) — अरहर के भारी परागकण हवा से नहीं उड़ते, बल्कि Megachile और Apis मधुमक्खियों के फूल पर बैठने (Tripping) से फैलते हैं।

10. पिछले दो दशकों से मध्य भारत में सर्वाधिक क्षेत्रफल पर उगाई जाने वाली जबलपुर (JNKVV) द्वारा विकसित मेगा सोयाबीन किस्म कौन सी है?

  • (A) JS 335 (जवाहर सोयाबीन 335)
  • (B) पंजाब-1
  • (C) कालीतुर
  • (D) पूसा-16
उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A) — JS 75-46 × Bragg के संकरण से विकसित 'JS 335' भारत के सोयाबीन इतिहास की सबसे सफल किस्म रही है।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. अरहर की 'Cajanus cajan var. bicolor' और 'var. flavus' को सामान्य भाषा में क्या कहा जाता है?

var. bicolor को 'अरहर' (देर से पकने वाली, उत्तर भारत) और var. flavus को 'तूर' (जल्दी पकने वाली, दक्षिण/मध्य भारत) कहा जाता है।

2. अरहर में संकर प्रजनन के लिए सन् 2010 में विकसित प्रथम A4-CGMS संकर 'ICPH-2671' का लोकप्रिय नाम क्या है?

पुष्कल (Pushkal — डॉ. के.बी. सक्सेना एवं सहयोगियों द्वारा ICRISAT में विकसित)।

3. सोयाबीन के बीज में प्रोटीन और तेल का औसत प्रतिशत कितना होता है?

प्रोटीन: 40–42% और खाद्य तेल: 18–20%।

4. सोयाबीन की मात्र 82–85 दिन में पकने वाली प्रसिद्ध अति-अगेती किस्म कौन सी है?

JS 95-60 (जवाहर सोयाबीन 95-60)।

5. अरहर की किस जंगली प्रजाति में फली छेदक (Helicoverpa armigera) के विरुद्ध उच्च प्रतिरोध पाया जाता है?

Cajanus scarabaeoides एवं Cajanus platycarpus में।

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. अरहर की दोनों वानस्पतिक किस्मों—Cajanus cajan var. bicolor और var. flavus—में मुख्य अंतर लिखिए।

var. bicolor (अरहर) के पौधे लंबे, अधिक शाखित व बहुवर्षीय स्वभाव के होते हैं, यह देर से (180–260 दिन) पकती है, फूल पर लाल धारियाँ होती हैं और फली में 4–5 दाने होते हैं। जबकि var. flavus (तूर) के पौधे छोटे व एकवर्षीय होते हैं, यह जल्दी (120–150 दिन) पकती है, फूल पीले होते हैं और फली में 2–3 दाने होते हैं।

2. अरहर में GMS संकर (ICPH-8) की तुलना में CGMS संकर (ICPH-2671) अधिक सफल क्यों हुए?

GMS संकर (ICPH-8) में नर बंध्यता एक अप्रभावी केंद्रकीय जीन (ms1ms1) से नियंत्रित थी, जिसके कारण मादा पंक्ति में 50% पौधे नर उर्वर निकलते थे जिन्हें फूल आने पर हाथ से उखाड़ना पड़ता था। इसके विपरीत, C. cajanifolius के A4 कोशिकाद्रव्य से बने CGMS संकर (ICPH-2671) में A-line के 100% पौधे नर बंध्य होते हैं, जिससे बीज उत्पादन सरल व सस्ता हो गया।

3. सोयाबीन में पोषण-रोधी कारकों (Anti-nutritional factors) को हटाने के लिए किए गए प्रजनन कार्यों का वर्णन कीजिए।

सोयाबीन में 'Kunitz Trypsin Inhibitor (KTI)' प्रोटीन पाचन रोकता है और 'Lipoxygenase (Lox)' एंजाइम सोया उत्पादों में बीनी गंध पैदा करता है। IISR इंदौर और IARI ने मार्कर-सहायता प्राप्त प्रतीप संकरण (MABB) द्वारा 'NRC 127' (KTI-मुक्त) तथा 'NRC 132' व 'NRC 142' (KTI और Lipoxygenase-2 दोनों से मुक्त) किस्में विकसित की हैं।

4. सोयाबीन में बीज की अंकुरण क्षमता (Seed Longevity) जल्दी क्यों घटती है और इसका प्रजनन समाधान क्या है?

सोयाबीन के बड़े पीले बीजों का बीजचोल बहुत पतला होता है और भ्रूण (Radicle) सतह के ठीक नीचे उभरा रहता है, जिससे थ्रेशिंग व भंडारण की नमी में वह क्षतिग्रस्त हो जाता है। इसके समाधान हेतु देसी काली सोयाबीन ('कालीतुर' व 'भट्ट') से मोटे बीजचोल और छोटे बीज आकार (<10–12 g/100 बीज) के जीन आधुनिक किस्मों में डाले गए हैं।

5. अरहर में संकर बीज उत्पादन के लिए पृथक्करण दूरी और कतार अनुपात क्या रखा जाता है?

चूँकि अरहर में कीटों (Megachile मधुमक्खियों) द्वारा 20% तक पर-परागण होता है, इसलिए संकर बीज उत्पादन हेतु आधार बीज में 250 मीटर और प्रमाणित बीज में 100 मीटर पृथक्करण दूरी रखी जाती है तथा खेत में 4 मादा (A-line) : 1 नर (R-line) कतार अनुपात रखकर प्रति हेक्टेयर 4–5 मधुमक्खी बक्से रखे जाते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. अरहर (Cajanus cajan) की उत्पत्ति, जंगली संबंधियों, वानस्पतिक वर्गीकरण, पुष्प जीवविज्ञान और संकर प्रजनन (GMS एवं CGMS प्रणाली) का सविस्तर वर्णन कीजिए।

भारतीय उत्पत्ति, C. cajanifolius व C. scarabaeoides की भूमिका, var. bicolor व var. flavus की तुलना, बहुधा पर-परागण तंत्र तथा ICPH-8 (GMS) से लेकर GTH-1 और ICPH-2671 (A4 CGMS) तक के संकर विकास और प्रमुख किस्मों (UPAS-120, Asha, Maruti, Bahar) का विस्तृत विवरण दें।

2. सोयाबीन (Glycine max) की उत्पत्ति, पुष्प जीवविज्ञान, प्रजनन की प्रमुख समस्याओं (Seed longevity, Shattering, KTI, Lipoxygenase, Rust) और भारत में सोयाबीन सुधार की उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।

चीनी उत्पत्ति व Glycine soja पूर्वज, अनुन्मील्य स्व-परागण, USA से पुरःस्थापित किस्में (Bragg, Lee), वंशावली विधि से विकसित किस्में (JS 335, JS 95-60, PK-472, MACS 1407) और MABB द्वारा विकसित KTI व Lipoxygenase मुक्त किस्मों (NRC 127, NRC 142) का सविस्तर वर्णन करें।

3. खरीफ दलहनी फसलों (मूँग, उड़द, मोठ, लोबिया एवं अरहर) में जंगली प्रजातियों के उपयोग (Pre-breeding & Wide Hybridization) और पादप प्रारूप सुधार की विवेचना कीजिए।

मूँग × उड़द संकरण, V. sublobata से प्री-हार्वेस्ट स्प्राउटिंग प्रतिरोध, C. cajanifolius व C. scarabaeoides से अरहर में CMS व फली छेदक प्रतिरोध तथा अनिश्चित फैलने वाली किस्मों से निश्चित, सीधी व अगेती किस्मों के विकास का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करें।

परीक्षा वन-लाइनर्स

  • अरहर (Cajanus cajan) विश्व की एकमात्र ऐसी दलहनी फसल है जिसमें व्यावसायिक रूप से CMS संकर (GTH-1, ICPH-2671) उगाए जाते हैं।
  • डॉ. के.बी. सक्सेना (Dr. K.B. Saxena) को अरहर में संकर प्रजनन (Hybrid Pigeonpea Breeding) के अग्रदूत के रूप में जाना जाता है।
  • सोयाबीन में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले विशिष्ट सहजीवी जीवाणु का नाम 'Bradyrhizobium japonicum' है।
  • आईआईएसआर (IISR, इंदौर) द्वारा विकसित 'NRC 127' भारत की प्रथम Kunitz Trypsin Inhibitor (KTI) मुक्त सोयाबीन किस्म है।
  • अरहर की अति-अगेती बौनी किस्म 'प्रभात' (Prabhat) मात्र 110–115 दिन में पक जाती है और GMS के मूल स्रोत के रूप में प्रयुक्त हुई।

आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध GPB 311 Smart Notes।

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