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मूंगफली की खेती: खरीफ POP व किसान कार्ययोजना | जोधपुर संदर्भ

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खरीफ • तिलहन • जोधपुर खंड

स्रोत का वर्ष 2018 है, वर्तमान मौसम की आधिकारिक POP नहीं। नीचे पुरानी क्षेत्रीय पुस्तक की खेती-संबंधी जानकारी सरल रूप में दी गई है। किस्म की उपलब्धता, बुवाई का समय, पोषण और उपचार अपने खेत की मिट्टी, पानी व वर्तमान स्थानीय सलाह से मिलाएं। संकलन: 29 अक्टूबर 2026; इसे नई तकनीकी सिफारिश जारी होने की तारीख न समझें।

सीधे पढ़ें: खेत व किस्म · बुवाई · पोषण · पानी · रोग-कीट · कटाई · स्रोत

1. खेत, मिट्टी और किस्म चुनें

भुरभुरी जल निकास वाली भूमि में किस्म चुनें। गुच्छेदार, अर्द्धफैलने और फैलने वाली किस्मों की बीज दर व दूरी अलग है। पुस्तक में TG-39, GG-20 और गिरनार-2 जैसे विकल्प हैं।

2. बुवाई का समय और खेत की तैयारी

गुच्छेदार किस्मों के लिए मध्य जून और फैलने वाली के लिए जून का पहला-दूसरा सप्ताह संदर्भ है। वास्तविक बुवाई उपयोगी वर्षा और नमी से मिलाएं।

3. बीज, दूरी और पौध संख्या

गुच्छेदार में लगभग 100 किग्रा दाना-बीज/हेक्टेयर, कतार 30 सेमी। फैलने वाली में 60-80 किग्रा और कतार 40-45 सेमी। बीज की मात्रा दानों की है, छिलके वाली फलियों की नहीं।

4. खाद और पोषण की योजना

प्रारंभिक N और फॉस्फेट के साथ कैल्शियम/सल्फर की जरूरत पर ध्यान दें। पुस्तक में सिंचित खेत में 250 किग्रा जिप्सम/हेक्टेयर का संदर्भ है; मिट्टी और दूसरे स्रोतों को गिने बिना अंधाधुंध न दें।

5. सिंचाई और नमी प्रबंधन

फूल और दाना बनने पर सूखा हो तो सिंचाई उपयोगी। केवल एक पानी मिले तो पुस्तक में 55-75 दिन की अवधि प्राथमिक दी है; अवस्था व मौसम देखें।

6. निराई-गुड़ाई और खरपतवार

आरंभिक निराई समय से करें। पेग जमीन में जाने के बाद गहरी गुड़ाई से फल बनने की प्रक्रिया को चोट न दें।

7. रोग-कीट की पहचान और प्रबंधन

सफेद लट, दीमक, कॉलर/तना गलन व पत्ती रोग देखें। स्वस्थ बीज, फसल चक्र व जल निकास अपनाएं। खराब पौधे की जड़ खोलकर सही कारण पहचानें।

8. कटाई, सुखाई और भंडारण

लगभग 80% फलियां पकें और परिपक्वता की जांच हो तो खुदाई करें; केवल हरी पत्ती देखकर फसल कच्ची न मानें। अच्छी तरह सुखाकर ही फलियां अलग व भंडारित करें।

9. इस फसल में खास ध्यान

नमी वाली मूंगफली में फफूंद और अफ्लाटॉक्सिन का जोखिम है। फफूंदीदार/बदबू वाले दाने को अच्छे दानों में मिलाकर खाद्य या चारे में न दें।

खेत में काम करने से पहले यह जाँचें

  • बीज का नाम, बिल, लॉट और अंकुरण जाँचें। किस्म के लिए क्षेत्र व सिंचाई की अनुकूलता पूछें।
  • मिट्टी परीक्षण, पिछली फसल की खाद, उपलब्ध पानी और मौसम देखकर खेत की लिखित योजना बनाएं।
  • जहाँ किग्रा/हेक्टेयर लिखा है वह प्रति हेक्टेयर मात्रा है। उर्वरक पोषक तत्व की मात्रा को यूरिया/DAP की बोरी का वजन न मानें; उत्पाद की संरचना अनुसार स्थानीय विशेषज्ञ से गणना कराएं।
  • खेत में कीट/रोग की तस्वीर के साथ फसल की उम्र और प्रभावित क्षेत्र नोट करें। बिना पहचान कई दवाओं को मिलाकर प्रयोग न करें।

पुराने रसायन संबंधी निर्देशों के बारे में

इन पुरानी पुस्तकों में कुछ ऐसे रसायन, उपचार और घरेलू मिश्रण भी हैं जिन्हें आज की अनुमति मानकर उपयोग नहीं करना चाहिए। यहाँ पुराने कीटनाशी/खरपतवारनाशी/कवकनाशी की दरें और तेजाब या धूमन की घरेलू विधियां नहीं दोहराई गई हैं। किसी उत्पाद की वर्तमान फसल-कीट अनुमति, formulation, label मात्रा, सुरक्षा और कटाई/चारा प्रतीक्षा अवधि की पुष्टि स्थानीय कृषि विभाग/KVK से करें। जैविक उत्पाद भी अपने-आप हानिरहित या प्रमाणित नहीं होते।

मूल स्रोत और संदर्भ

जोधपुर खरीफ फसलों की उन्नत कृषि विधियां, 2018। प्रकाशक: संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार), खंड जोधपुर; तकनीकी आधार: कृषि अनुसंधान केन्द्र, मंडोर व क्षेत्रीय सिफारिशें। संबंधित मुद्रित पृष्ठ: 54-59। यह स्वतंत्र सरल संकलन है, मूल विभाग का नया परिपत्र नहीं।

मूल खरीफ PDF देखें (लगभग 44 MB, पुराना संदर्भ)। PDF में पुरानी रसायन सलाह वर्तमान अनुमति नहीं है।

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